कानपुर की गौशाला में दलदल में फंसे गोवंश, खुले में पड़े शवों को नोचते मिले कुत्ते; निरीक्षण में सामने आई बदहाली

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कानपुर की गौशाला में दलदल में फंसे गोवंश, खुले में पड़े शवों को नोचते मिले कुत्ते; निरीक्षण में सामने आई बदहाली

कानपुर जिले के भीतरगांव विकासखंड स्थित बेहटा-गंभीरपुर गो-आश्रय स्थल में गोवंश के रखरखाव की गंभीर स्थिति सामने आई है। अधिकारियों के औचक निरीक्षण के दौरान परिसर में कई गोवंश दलदल में फंसे और बेहद कमजोर हालत में मिले। वहीं, कुछ मृत गोवंशों के शव खुले में पड़े थे, जिन्हें कुत्ते नोचते दिखाई दिए। यह स्थिति गो-आश्रय स्थल की व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

दलदल में फंसे मिले कई गोवंश

नायब तहसीलदार शिखा शुक्ला, भीतरगांव के बीडीओ गिरीश चंद्र मिश्रा और सचिव बृजेश यादव के निरीक्षण के दौरान आश्रय स्थल के अंदर कई गोवंश दलदल में फंसे मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पशु बेहद कमजोर और बीमार हालत में थे। एक-दो गोवंश के मुंह से फेन निकलता दिखाई दिया, जबकि कुछ हांफते हुए नजर आए।

निरीक्षण के दौरान परिसर में मृत गोवंश के शव भी पाए गए। कुछ शव खुले में पड़े थे और कुत्ते उन्हें नोच रहे थे। एक अन्य स्थान पर कुत्तों द्वारा जमीन में दबाए गए शव को बाहर निकालने की स्थिति भी सामने आई।

105 गोवंश की जिम्मेदारी, तीन केयरटेकर

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, बेहटा-गंभीरपुर गो-आश्रय स्थल में करीब 105 गोवंश मौजूद हैं और उनकी देखरेख के लिए तीन केयरटेकर नियुक्त हैं। इसके बावजूद निरीक्षण में जिस तरह की स्थिति सामने आई, उससे पशुओं की नियमित निगरानी, बीमार गोवंश के उपचार और मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण को लेकर सवाल उठते हैं।

बताया गया है कि पिछले एक सप्ताह के दौरान कई गोवंशों की मौत हुई थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन मौतों का आधिकारिक चिकित्सकीय कारण या मृत गोवंशों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए मौतों के कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

पहले भी सामने आ चुकी हैं व्यवस्थाओं की कमियां

बेहटा-गंभीरपुर गो-आश्रय स्थल की व्यवस्थाओं को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। मार्च 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में इसी आश्रय स्थल में गर्मी के दौरान पर्याप्त छाया और पानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति का उल्लेख किया गया था। उस समय परिसर में गोवंश के लिए बनाया गया तालाब सूखा पाया गया था और पर्याप्त छाया नहीं होने की बात सामने आई थी।

वहीं, कानपुर के एक अन्य गो-आश्रय केंद्र में अगस्त 2026 के अंत में निरीक्षण के दौरान गेट बंद मिलने, चारे की कमी, गंदगी और निगरानी व्यवस्था की कमी सामने आने के बाद प्रशासन ने भूसा उपलब्ध कराने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इससे जिले में गो-आश्रय स्थलों की जमीनी निगरानी को लेकर व्यापक सवाल उठते हैं, हालांकि दोनों मामले अलग-अलग आश्रय केंद्रों से संबंधित हैं।

अब निगरानी और जिम्मेदारी पर सवाल

बेहटा-गंभीरपुर में निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति का सबसे गंभीर पहलू यह है कि दलदल में फंसे, बीमार और मृत गोवंश की स्थिति नियमित निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। आश्रय स्थल में तैनात कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की गई, मृत पशुओं की संख्या कितनी थी और उनकी मौत के कारण क्या रहे, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।

ऐसे में पूरे मामले में प्रशासन की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। खासकर यह देखना होगा कि बीमार और दलदल में फंसे गोवंश को तत्काल उपचार एवं सुरक्षित स्थान मिलता है या नहीं और मृत पशुओं के शवों के निस्तारण की व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जाती है।

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