कानपुर में किराए के कमरे में चल रही थी नकली नोटों की ‘फैक्ट्री’, तीन गिरफ्तार, 2 लाख से ज्यादा की जाली करेंसी बरामद

indianloveindia
5 Min Read
कानपुर में किराए के कमरे में चल रही थी नकली नोटों की 'फैक्ट्री', तीन गिरफ्तार, 2 लाख से ज्यादा की जाली करेंसी बरामद

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक नकली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रेल बाजार थाना क्षेत्र में रामलीला मैदान के पास किराए के एक कमरे में बाहर से सामान्य दिखने वाले इस ठिकाने के अंदर कथित तौर पर नकली नोटों की ‘फैक्ट्री’ चलाई जा रही थी, जहां प्रिंटर की मदद से जाली करेंसी तैयार की जाती थी।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय संकल्प शर्मा के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि रामलीला मैदान के पास किराए के कमरे में नकली नोट छापे जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने छापेमारी कर मौके से बांगरमऊ, उन्नाव निवासी शेर सिंह (52), मूलगंज चौराहा निवासी रोशन अली (24) और उरई, जालौन निवासी सोमिल गुप्ता (36) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड शेर सिंह सिर्फ पांचवीं तक पढ़ा है, लेकिन उसने प्रिंटर और अन्य उपकरणों की मदद से नकली करेंसी तैयार करने का तरीका सीख लिया था। फिलहाल शेर सिंह चकेरी इलाके में संजू पुलिया के पास किराए के कमरे में रह रहा था।

2 लाख 4 हजार 650 रुपए के जाली नोट बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 2 लाख 4 हजार 650 रुपए मूल्य के नकली नोट बरामद किए हैं, जिनमें 100 रुपए के 1,991 नोट, 50 रुपए के 71 नोट और 500 रुपए के 4 नोट शामिल हैं। इससे साफ है कि गिरोह छोटे मूल्य के नोटों पर ज्यादा निर्भर था, ताकि उन्हें बाजार में आसानी से खपाया जा सके। इसके अलावा कमरे से एक प्रिंटर, कैंची, दो पेपर कटर, दो स्केल, इंक की खाली और भरी बोतलें, कागज का रिम, कपड़े, ट्रॉली बैग और अन्य सहायक सामान भी बरामद हुआ है।

‘एक के बदले तीन’ के फॉर्मूले पर होता था सौदा

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह नकली नोटों का सौदा ‘एक असली के बदले तीन नकली’ के हिसाब से करता था — यानी जितनी असली रकम कोई व्यक्ति देता, उसे उसके बदले तीन गुना मूल्य के जाली नोट थमाए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य निशाना रेलवे स्टेशनों के आसपास की छोटी दुकानें और स्टेशन आने-जाने वाले यात्री होते थे, जहां जल्दबाजी में नकली नोट पहचान पाना मुश्किल होता है।

तीनों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड

पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपी पहले भी अपराध के मामलों में जेल जा चुके हैं। सोमिल गुप्ता पर 5, रोशन अली पर 7 और शेर सिंह पर 4 आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह की योजना कथित तौर पर ट्रेन में यात्रा के दौरान बनी थी और तीनों पहले ट्रेनों में चोरी तथा गांजा बेचने जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं, हालांकि पुलिस इन दावों की अलग से पुष्टि कर रही है।

सहारनपुर जाली नोट कांड से संभावित संबंध की जांच

पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के तार हाल ही में सामने आए सहारनपुर बैंक करेंसी चेस्ट जाली नोट मामले से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसमें एनआईए (NIA) लखनऊ पहले ही एक बैंक अधिकारी को गिरफ्तार कर चुकी है। हालांकि इस संभावित संबंध की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश में पुलिस

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट छापने का यह काम कितने समय से चल रहा था, और शेर सिंह अकेले यह काम कर रहा था या किसी और व्यक्ति की तकनीकी मदद भी ले रहा था। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि अब तक कितनी जाली करेंसी छापी जा चुकी है और बाजार में कितने नोट पहुंच चुके हैं। पुलिस कानपुर सेंट्रल के अलावा आसपास के जिलों के रेलवे स्टेशनों और वहां के बाजारों में भी इस नेटवर्क के संपर्क तलाश रही है। फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

Share This Article