आगरा: बीएएमएस विद्यार्थियों के पंचकर्म विषय के रिजल्ट में शुक्रवार शाम अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला। जिन छात्रों को पहले परीक्षा में 25 से 32 अंक तक मिले थे और वे फेल हो गए थे, संशोधित परिणाम में उनके अंक बढ़कर 70 से 75 के बीच पहुंच गए। रिजल्ट में इतनी बड़ी संख्या में अंकों के बदलाव ने विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
25 अंक वाले छात्र के 75 कैसे हो गए?
संशोधित रिजल्ट सामने आने के बाद विद्यार्थियों ने अपने पुराने और नए अंकों की जानकारी साझा की। इनमें कई मामलों में 40 से 50 अंकों तक की बढ़ोतरी हुई है।
विद्यार्थी आर्यन के मुताबिक, पंचकर्म में उसे पहले 30 अंक मिले थे, लेकिन संशोधित परिणाम में उसके अंक बढ़कर 71 हो गए।
इसी तरह अरविंद के अंक 32 से बढ़कर 74, विकास के 29 से बढ़कर 73 और गौरव के 25 से बढ़कर 75 हो गए।
यानी जिन विद्यार्थियों को पहले फेल घोषित किया गया था, संशोधित परिणाम में वे पास हो गए हैं।
एक साथ इतने नंबर बढ़ने से उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पहली बार मूल्यांकन के दौरान ऐसी गलती कैसे हुई कि छात्रों को 25-32 अंक मिले और संशोधित परिणाम में वही अंक 70-75 तक पहुंच गए?
यदि संशोधित अंक सही हैं तो शुरुआती मूल्यांकन में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? और यदि पहले दिए गए अंक सही थे तो बाद में इतनी बड़ी संख्या में अंकों में बदलाव किस आधार पर किया गया?
इन सवालों का जवाब अब विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रक्रिया और संबंधित परीक्षकों की भूमिका की जांच से सामने आ सकता है।
प्रदर्शन के बाद बदला गया रिजल्ट
पंचकर्म विषय में फेल हुए बीएएमएस छात्रों ने 18 अगस्त को विश्वविद्यालय में दोपहर से रात तक प्रदर्शन किया था। छात्रों की मांग थी कि उनके परिणाम की दोबारा जांच कराई जाए।
प्रदर्शन के दौरान कुलपति प्रो. आशु रानी ने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया था कि यदि जांच में मूल्यांकन करने वाले परीक्षक की गलती सामने आती है तो संबंधित परीक्षक को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
अब संशोधित परिणाम में बड़े पैमाने पर अंकों के बदलाव के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि मूल्यांकन में वास्तव में कहां और किस स्तर पर गलती हुई थी।
परीक्षकों पर कार्रवाई की तलवार
संशोधित परिणाम में छात्रों के अंक बढ़ने से विश्वविद्यालय के सामने अब मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब देने की चुनौती है। अगर जांच में यह साबित होता है कि पहली बार कॉपियों के मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही हुई थी, तो संबंधित परीक्षकों पर कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल छात्रों को संशोधित परिणाम से राहत मिली है, लेकिन 25 से 75 और 32 से 74 तक अंकों में हुए बदलाव ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

