दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रावास की इमारत ढहने से हुई मौतों ने मथुरा-वृंदावन में भी छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में बड़ी संख्या में छात्र पीजी और हॉस्टलों में रहते हैं, वहीं शहर के कुछ घने और संकरे इलाकों में आवासीय भवनों को पीजी या व्यावसायिक हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दिल्ली हादसे के बाद जिला प्रशासन ने ऐसे भवनों की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए हैं।
मथुरा के इन इलाकों में सुरक्षा पर सवाल
बीएसए कॉलेज रोड, कृष्ण नगर, महोली रोड और गोवर्धन रोड समेत कई इलाकों में आवासीय मकानों को पीजी के तौर पर संचालित किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे भवनों में निर्माण स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकास जैसे मानकों की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
हालांकि, इन इलाकों में कितने पीजी या हॉस्टल नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं, इसकी कोई आधिकारिक संख्या फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए सभी पीजी को असुरक्षित या अवैध बताना उचित नहीं होगा। प्रशासन की प्रस्तावित जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
दिल्ली हादसे के बाद प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हॉस्टल के रूप में इस्तेमाल की जा रही बहुमंजिला इमारत ढह गई थी। हादसे में कई लोगों की मौत हुई और छात्र समेत कई लोग मलबे में फंसे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इमारत में पीजी संचालित हो रहा था और हादसे के बाद भवन की सुरक्षा, निर्माण और बेसमेंट में चल रहे काम को लेकर सवाल उठे हैं।
मथुरा में जिला प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए बिना मानकों के संचालित पीजी और व्यावसायिक हॉस्टलों की जांच के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों की टीमें जर्जर और संदिग्ध भवनों का सर्वे करेंगी।
सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र के अनुसार, सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए जर्जर भवनों की जांच कराई जाएगी। यदि किसी भवन में निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सिर्फ बारिश नहीं, भवन की सुरक्षा भी अहम
मानसून के दौरान लगातार बारिश के बीच पुराने और कमजोर भवनों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। लेकिन किसी भवन की नींव केवल बारिश के कारण कमजोर हो रही है, ऐसा बिना तकनीकी जांच के कहना सही नहीं होगा। भवन की उम्र, निर्माण गुणवत्ता, संरचनात्मक बदलाव, जलभराव और किए गए निर्माण कार्य जैसे कई कारक उसकी सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं।
यही वजह है कि मथुरा में होने वाला प्रस्तावित सर्वे केवल जर्जर दिखाई देने वाली इमारतों तक सीमित न रहकर पीजी और हॉस्टलों में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, स्वीकृत नक्शा, अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकास जैसे पहलुओं की भी जांच करे तो छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से अधिक उपयोगी होगा।
मथुरा में पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
मथुरा-वृंदावन में सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पहले भी सामने आ चुकी है। जून 2026 में वृंदावन के चैतन्य विहार क्षेत्र में संयुक्त टीम ने बिना फायर एनओसी और स्वीकृत नक्शे के संचालित 19 होटल, गेस्ट हाउस, आश्रम और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया था।
यह कार्रवाई बताती है कि भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और सुरक्षा मानकों की जांच का मुद्दा नया नहीं है। अब दिल्ली के हादसे के बाद पीजी और छात्रावासों की जांच पर प्रशासन का ध्यान जाना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन भवनों में बड़ी संख्या में छात्र एक साथ रहते हैं।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठी नियमित जांच की मांग
दिल्ली की घटना के बाद मथुरा में कांग्रेस, भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने होली गेट चौराहे पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। संगठनों ने हादसे की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के साथ दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
कार्यकर्ताओं ने छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती सरकारी हॉस्टल उपलब्ध कराने तथा निजी पीजी की नियमित सुरक्षा जांच और निर्माण मानकों के सख्त पालन की मांग भी उठाई।
अब कार्रवाई पर रहेगी नजर
मथुरा प्रशासन की ओर से जांच के निर्देश दिए जाने के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि सर्वे में कितने पीजी और हॉस्टल शामिल किए जाते हैं और सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर क्या कार्रवाई होती है। छात्रों के लिए सुरक्षित आवास केवल किराए और सुविधाओं का सवाल नहीं, बल्कि भवन की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा और आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलने की व्यवस्था से भी जुड़ा है।
दिल्ली की घटना ने यह मौका दिया है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय मथुरा-वृंदावन में छात्र आवासों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पहले ही जांच ली जाए।

