पुरी: ओडिशा के पुरी जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस को तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी भी मिली। पेंठाकाटा मरीन थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव स्थित एक किराए के मकान से पुलिस ने 183 किलो गांजा और 64.5 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद करने का दावा किया है। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब गांजे के स्रोत के साथ-साथ इतनी बड़ी नकदी के स्रोत की भी जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई एक सूचना के आधार पर की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि कार्तिका सामंतराय और देवेंद्र कुमार साहू ने फार्मेसी कॉलेज के पास एक मकान किराए पर लिया था। आरोप है कि इस मकान का इस्तेमाल गांजा रखने और उसकी सप्लाई के लिए किया जा रहा था।
176 पैकेट में रखा था गांजा
तलाशी के दौरान गांजा 176 अलग-अलग पैकेटों में मिला। कुल वजन करीब 183 किलोग्राम बताया गया है। पुलिस को संदेह है कि यह खेप आगे बिक्री के लिए रखी गई थी।
पुरी के एसपी प्रतीक सिंह के अनुसार, पुलिस की टीम करीब एक महीने से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। सूचना पुख्ता होने के बाद किराए के मकान पर छापा मारा गया।
गांजे के साथ 64.5 लाख रुपये नकद
पुलिस को मकान की तलाशी के दौरान 64.5 लाख रुपये की नकदी भी मिली। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकदी का गांजा कारोबार से कोई संबंध है या नहीं।
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर नकदी को हाल में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा बताया है। हालांकि, पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और अभी इसे नकदी का प्रमाणित स्रोत नहीं माना गया है।
कहां से आता था गांजा?
जांच एजेंसियां अब कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गांजा कहां से खरीदा जाता था, इसे पुरी तक कौन पहुंचाता था और आगे इसकी सप्लाई किन लोगों को की जानी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, गांजा ओडिशा के कंधमाल और बौध जिलों से लाए जाने की आशंका है। हालांकि, इस सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
आरोपियों का पहले भी रहा है ड्रग केस से संबंध
पुरी एसपी प्रतीक सिंह ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले भी ड्रग से जुड़े मामलों में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि दोनों खुद इस कथित नेटवर्क को चला रहे थे या किसी बड़े तस्करी गिरोह के लिए काम कर रहे थे।
जांच में पुलिस सप्लायर, परिवहन से जुड़े लोगों, संभावित फाइनेंसर और गांजे के संभावित खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों के वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के सामने अब दो बड़ी पहेलियां
इस कार्रवाई के बाद जांच का फोकस सिर्फ बरामद गांजे तक सीमित नहीं है। पुलिस को अब दो अहम सवालों के जवाब तलाशने हैं—183 किलो गांजा आखिर कहां से आया और 64.5 लाख रुपये नकद का वास्तविक स्रोत क्या है?
पुलिस का कहना है कि दोनों पहलुओं की जांच की जा रही है। बरामद नकदी को लेकर आरोपियों द्वारा किए गए जमीन सौदे के दावे का सत्यापन भी किया जा रहा है। साथ ही कथित गांजा नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों की पहचान की जा रही है।

