अलीगढ़: राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में विशेष बैक परीक्षा में अनुत्तीर्ण विधि छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। छात्र ग्रेस मार्क्स देकर पास करने और अगले सेमेस्टर में सीधे प्रवेश देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने नियमों का हवाला देते हुए इन मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है।
बुधवार को धर्म समाज महाविद्यालय के बीएएलएलबी और एलएलबी छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य गेटों पर ताले भी लगा दिए। इस दौरान पुलिस ने 10 छात्रों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। बृहस्पतिवार को हालांकि विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति सामान्य रही।
छात्रों की क्या है मांग?
डीएस कॉलेज के विधि छात्रों का कहना है कि बीएएलएलबी और एलएलबी के द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के कई विद्यार्थी विशेष बैक परीक्षा में फेल हो गए हैं। छात्रों की दलील है कि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें विशेष राहत दी जानी चाहिए।
इसी मांग को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और अगले सेमेस्टर में प्रवेश तथा ग्रेस मार्क्स के जरिए पास करने की मांग उठाई।
विश्वविद्यालय ने क्यों कहा- नहीं दे सकते सीधे प्रवेश?
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि बैक परीक्षा में शामिल होने का निर्धारित अवसर विद्यार्थियों को दिया जाता है। इसके बाद भी यदि कोई विद्यार्थी उत्तीर्ण नहीं होता है तो उसे एक्स छात्र के रूप में परीक्षा देनी होगी।
कुलसचिव के मुताबिक, विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के प्रावधानों के तहत अनुत्तीर्ण विद्यार्थी को सीधे अगले सेमेस्टर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता। इसलिए विश्वविद्यालय अपनी ओर से नियमों को दरकिनार कर फेल छात्रों को सीधे आगे नहीं बढ़ा सकता।
ग्रेस मार्क्स का नियम भी साफ
छात्रों की ग्रेस मार्क्स देने की मांग पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। कुलसचिव के अनुसार ग्रेस मार्क्स देने का प्रावधान केवल अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए है।
इसलिए दूसरे या तीसरे वर्ष में विशेष बैक परीक्षा में असफल हुए विद्यार्थियों को इस आधार पर पास करना नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
परीक्षा नियंत्रक ने सुनाया एक छात्रा का उदाहरण
परीक्षा नियंत्रक धीरेंद्र सिंह ने नियम समझाने के लिए एक विधि छात्रा का उदाहरण दिया। उनके अनुसार छात्रा ने सत्र 2022-23 में प्रवेश लिया था और पहले सेमेस्टर में चार विषयों में फेल हो गई थी।
उसने दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा नहीं दी और बाद में 2023-24 में एक्स फॉर्म भरा। हालांकि पहले सेमेस्टर में वह पास हो गई, लेकिन उसके कुल अंक आवश्यक 48 प्रतिशत तक नहीं पहुंच सके।
परीक्षा नियंत्रक के मुताबिक ऐसी स्थिति में छात्रा के पास अब एक्स छात्र के रूप में परीक्षा देने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।
प्रदर्शन के बाद भी विश्वविद्यालय का रुख कायम
बुधवार के प्रदर्शन और छात्रों की मांगों के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने नियमों में किसी तरह की छूट देने का संकेत नहीं दिया है। फिलहाल छात्रों और विश्वविद्यालय के बीच गतिरोध बना हुआ है।
विश्वविद्यालय का कहना है कि नियम सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होते हैं, जबकि छात्र शैक्षणिक सत्र बचाने के लिए विशेष राहत की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच बातचीत से इस विवाद का कोई रास्ता निकलने की उम्मीद है।
