RBI बेचेगा 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां, तीन चरणों में 17, 21 और 28 सितंबर को होगी नीलामी

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RBI बेचेगा 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां, तीन चरणों में 17, 21 और 28 सितंबर को होगी नीलामी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी खींचने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां तीन चरणों में बेचने की घोषणा की। यह पहला मौका है जब पिछले दो वर्षों में आरबीआई सरकारी बॉन्ड की शुद्ध बिक्री (नेट सेल) कर रहा है, इससे पहले सितंबर 2024 में सेकेंडरी मार्केट में इस तरह की बिक्री हुई थी।

कब-कब और कितनी होगी नीलामी

आरबीआई के अनुसार, पहले चरण में 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेची जाएंगी। इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नीलामियां होंगी। यह बिक्री मल्टी-सिक्योरिटी नीलामी के जरिए मल्टीपल प्राइस मेथड से की जाएगी। पहली नीलामी में 2029 से 2032 के बीच मैच्योर होने वाली छह सरकारी प्रतिभूतियां (GS) शामिल होंगी, जिनमें 7.59% GS 2029, 6.79% GS 2029, 7.61% GS 2030, 5.77% GS 2030, 6.68% GS 2031 और 8.28% GS 2032 शामिल हैं।

बोली जमा करने की प्रक्रिया

इच्छुक प्रतिभागियों को 17 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे के बीच आरबीआई के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (E-Kuber) सिस्टम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी बोलियां जमा करनी होंगी। नीलामी के नतीजे उसी दिन घोषित किए जाएंगे। सफल प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिभूतियां 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक उनके सब्सिडियरी जनरल लेजर (SGL) खाते में उपलब्ध हों।

यह कदम क्यों उठाया गया

आरबीआई ने अपने बयान में कहा कि बैंकिंग सिस्टम में मौजूद फंड्स की स्थिति और उसमें हो रहे बदलाव की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। दरअसल, विदेशी मुद्रा प्रवासी बैंक (FCNR-B) जमा योजना के तहत बैंकों ने उम्मीद से कहीं ज्यादा—करीब 127 अरब डॉलर—विदेशी मुद्रा जुटाई है, जिससे रिजर्व बैंक का भंडार अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और बैंकिंग सिस्टम में रुपये की तरलता (लिक्विडिटी) काफी बढ़ गई है। इस अतिरिक्त तरलता के चलते ओवरनाइट दरें नीति रेपो दर से नीचे चली गई थीं। इससे पहले आरबीआई वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामियों के जरिए भी अतिरिक्त फंड्स को सिस्टम से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हाल की लंबी अवधि की VRRR नीलामी को बाजार से सीमित प्रतिक्रिया मिली, जिसके बाद आरबीआई ने OMO बिक्री का यह बड़ा कदम उठाया। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस घोषणा से कुछ घंटे पहले ही कहा था कि तरलता की मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय बैंक के पास सभी विकल्प खुले हैं।

बॉन्ड बाजार पर असर

इस घोषणा के बाद सरकारी बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आई और यील्ड तीन महीने से ज्यादा के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.01-7.03 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई, जो 3 जून 2026 के बाद पहली बार 7 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। वहीं 5-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड भी करीब 6.60-6.62 प्रतिशत तक बढ़ी। बाजार विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में 10-वर्षीय यील्ड 6.98 से 7.15 प्रतिशत या उससे ऊपर के दायरे में रह सकती है, हालांकि यह अनुमान बाजार स्थितियों पर निर्भर करेगा और भविष्य में बदल भी सकता है।

आम लोगों के लिए क्या मायने

विशेषज्ञों के मुताबिक, आरबीआई की इस कार्रवाई का सीधा असर तुरंत लोन की EMI पर नहीं पड़ता, क्योंकि यह मुख्य रूप से बैंकिंग सिस्टम की तरलता प्रबंधन से जुड़ा कदम है, न कि नीति दर में सीधा बदलाव। हालांकि दीर्घकाल में बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से बाजार में ब्याज दरों की दिशा पर असर पड़ सकता है, जिसे आने वाले समय में देखा जाएगा।

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