रात का अंधेरा, बंद कमरे में चार हत्याएं और एक आत्महत्या। न कोई चश्मदीद गवाह है, न सीसीटीवी फुटेज और न ही वारदात की स्पष्ट कहानी। सरसावा की कौशिक विहार कॉलोनी में हुए नृशंस हत्याकांड को लेकर सवाल पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लेकिन पूरी वारदात कयासों पर आकर टिक गई है। पुलिस के साथ-साथ आम आदमी के जेहन में यही कयास है कि अशोक ने ऐसा किया होगा, अशोक ने वैसा किया होगा, लेकिन सबूत कोई नहीं।
इन सवालों के जवाब तलाशने हैं जरूरी :
सवाल : आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो चार-चार गोली मारी गईं।
कयास : पुलिस के साथ-साथ आस पड़ोस के लोग भी मान रहे हैं कि अशोक राठी ने अवसाद की वजह से इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम दिया और खुद गोली मार ली। चार-चार गोली इसलिए मारी गई कि कोई जिंदा न बच सके, लेकिन सबूत कोई नहीं।
सवाल : अशोक राठी ने सभी की हत्या की और फिर खुद को दो गोली कैसे मार लीं।
कयास : अशोक के सीने में एक गोली और दूसरी कनपटी पर लगी मिली। डॉक्टरों का कहना है कि पहले सीने में गोली मारी गई होगी। वह दिल के पास से गुजर कर पसलियों में फंस गई। ऐसे में व्यक्ति कुछ मिनटों तक जिंदा रहता है। इसके बाद अशोक ने दूसरी गोली अपनी कनपटी पर मार ली, लेकिन सबूत कोई नहीं।
सवाल : घटनास्थल पर तीन पिस्टल पड़ी मिलीं, वह कहां से आई।
कयास : अशोक राठी ने पूरी योजना के साथ नृशंस हत्याकांड को अंजाम दिया। इसके लिए वह पहले से ही पिस्टल और कारतूस लेकर आया होगा। किससे लेकर आया, इसका कुछ पता नहीं।
सवाल : कुल मिलाकर कमरे में 18 गोलियां चलीं। 16 गोली परिवार के सदस्यों और दो गोली अशोक को लगी थी, फिर भी किसी पड़ोसी को सुनाई नहीं दिया।
कयास : अशोक राठी ने वारदात को तड़के करीब तीन बजे अंजाम दिया। उस समय सभी गहरी नींद में सोए रहते हैं। इस वजह से किसी ने आवाज नहीं सुनीं। दूसरे पहलू पर गौर करें तो पड़ोस में रात के समय 18 गोलियां चलें और किसी को न सुनाई दें, यह संभव ही नहीं।
सवाल : सबसे पहले और सबसे बाद में किसको गोली मारी गई।
कयास : पहले अंजिता और बड़े बेटे को गोली मारी गई। इसके बाद मां के पास आकर गोली मारी और फिर छोटे बेटे को गोली मारी, लेकिन इसका सबूत कोई नहीं।
सवाल : सभी के शव एक ही कमरे में मिले, जो वहीं पर सो रहे थे, जबकि मकान में अन्य कमरे भी खाली थे।
कयास : अशोक अक्सर अलग कमरे में सोता था। उसे हत्याकांड को अंजाम देना था इस वजह उस कमरे में सोया, जहां पर पूरा परिवार सो रहा था, लेकिन सबूत कोई नहीं।

