‘आपके वाहन ने यातायात नियमों का उल्लंघन किया है, अधिक जानकारी के लिए एप्लीकेशन डाउनलोड करें’ — इस तरह के मैसेज इन दिनों बड़ी संख्या में लोगों के मोबाइल फोन पर पहुंच रहे हैं। ये संदेश खुद को ट्रैफिक पुलिस की ओर से भेजा गया बताते हैं और इनमें चालान का भुगतान करने के लिए एक लिंक भी दिया होता है। साइबर थाना पुलिस ने ऐसे मैसेज को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि जरा सी चूक से बैंक खाते में सेंध लग सकती है।
चालान के नाम पर नया ठगी का तरीका
साइबर अपराधी लोगों को झांसे में लेने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इन्हीं में एक तरीका अब यातायात चालान के नाम पर ठगी का है। पुलिस के अनुसार, यातायात विभाग इन दिनों कैमरों के जरिए चालान की कार्रवाई करता है, और चालान कटने के बाद वाहन मालिक के मोबाइल पर एक मैसेज भी आता है, जिसमें शमन शुल्क (कंपाउंडिंग फीस) जमा करने के लिए लिंक दिया जाता है। साइबर ठग असली प्रक्रिया की इसी नकल का फायदा उठाकर फर्जी लिंक वाले मिलते-जुलते मैसेज भेज रहे हैं, ताकि लोग बिना शक किए लिंक पर क्लिक कर दें और उनका मोबाइल व बैंक डेटा हैक हो जाए।
डीसीपी साइबर क्राइम ने दी सतर्क रहने की सलाह
डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि किसी भी संदेश को पढ़कर डर से नहीं, बल्कि समझदारी से काम लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि चालान के नाम पर डराकर तत्काल भुगतान कराने वाले संदेशों की पहले पुष्टि करनी चाहिए। चालान की धनराशि हमेशा सरकार की ओर से जारी अधिकृत पोर्टल पर ही जमा करनी चाहिए। यदि कोई संदेश संदिग्ध लगे तो उस पर क्लिक करने के बजाय सीधे संबंधित सरकारी पोर्टल या विभाग के अधिकृत माध्यम से चालान की स्थिति जांचनी चाहिए।
डीसीपी ने यह भी कहा कि किसी के साथ भी ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें और अनजान नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर सतर्क रहें। उनके अनुसार, अगर कोई कार्रवाई का डर दिखाकर रकम की मांग करता है, तो यह समझ लेना चाहिए कि यह ठगी की कोशिश हो सकती है।
क्या करें अगर ऐसा मैसेज मिले
साइबर पुलिस की सलाह के मुताबिक, चालान से जुड़े किसी भी संदिग्ध मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक न करें, चालान की स्थिति केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल पर जाकर जांचें, और किसी भी हाल में अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी फोन या एसएमएस के जरिए साझा न करें। ठगी की आशंका होने पर तुरंत नजदीकी साइबर थाने या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

