मकर संक्रांति का पर्व, जो पारंपरिक रूप से खिचड़ी के बिना अधूरा सा लगता है, इस वर्ष एक विशेष संयोग के कारण अपने पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जा सकेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का भी पर्व पड़ रहा है, जो 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल से बनी किसी भी सामग्री का सेवन वर्जित होता है।
एकादशी का प्रभाव और खिचड़ी पर रोक
वैदिक शिव सत्संग मंदिर के पुजारी, पंडित आशीष नौटियाल के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य देव दोपहर बाद 3:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे मकर संक्रांति का पुण्यकाल आरंभ होगा। वहीं, षटतिला एकादशी 13 जनवरी की शाम 3:18 बजे से शुरू होकर 14 जनवरी की शाम 5:53 बजे तक रहेगी। चूंकि एकादशी के दिन चावल का प्रयोग वर्जित है, इसलिए इस बार मकर संक्रांति पर चावल की खिचड़ी का प्रसाद नहीं बन सकेगा। यह एक ऐसा संयोग है जो लगभग दो दशक बाद आया है।
वैकल्पिक प्रसाद और दान का विधान
हालांकि चावल की खिचड़ी नहीं बन पाएगी, लेकिन श्रद्धालु गुड़, तिल या साबूदाने से बनी खिचड़ी का दान कर सकते हैं। पंडित पंकज पाराशर के अनुसार, मकर संक्रांति पर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। इस अवसर पर कंबल, घी और तिल का दान भी शुभ फलदायक होता है। एकादशी के चलते, भगवान को श्वेत तिल अर्पित किए जा सकते हैं।

