मुंबई के ट्रैफिक जाम में फंसे नितिन गडकरी, बोले- ‘इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं’, बताया समाधान

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मुंबई के ट्रैफिक जाम में फंसे नितिन गडकरी, बोले- 'इसके लिए मैं जिम्मेदार हूं', बताया समाधान

मुंबई के ट्रैफिक जाम का सामना केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी करना पड़ा। मुंबई में आयोजित 22वें इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में गडकरी करीब एक घंटे की देरी से पहुंचे। कार्यक्रम में उन्होंने देरी के लिए मुंबई के ट्रैफिक का जिक्र करते हुए इसकी जिम्मेदारी खुद पर ली और कहा कि यह उनके लिए अपनी ही बनाई पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था की कीमत चुकाने जैसा है।

गडकरी ने बताया कि वह वर्ली से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के दौरान करीब एक घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज कार्यक्रम में पहुंचने में उन्हें एक घंटा देर हुई, क्योंकि वर्ली से होटल तक आने में ही इतना समय लग गया। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इसकी गलती की कीमत मैं खुद चुका रहा हूं।”

पुराने फ्लाईओवरों को लेकर गडकरी ने क्या कहा?

मुंबई की ट्रैफिक समस्या का जिक्र करते हुए गडकरी ने अपने महाराष्ट्र के सार्वजनिक निर्माण मंत्री रहने के दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में मुंबई में बड़ी संख्या में फ्लाईओवरों के निर्माण के साथ-साथ बांद्रा-वर्ली सी लिंक और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम हुआ था।

गडकरी के मुताबिक उस समय उपलब्ध तकनीक और शहर की जरूरतों को देखते हुए इन परियोजनाओं की आवश्यकता थी। लेकिन अब ट्रैफिक का दबाव बढ़ चुका है और तकनीक भी काफी आगे निकल चुकी है। ऐसे में पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को नई तकनीक के साथ अपग्रेड करने की जरूरत है।

उन्होंने मौजूदा फ्लाईओवरों के कारण पैदा होने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए मल्टी-लेवल फ्लाईओवर की अवधारणा का सुझाव दिया। उनके मुताबिक एक ही पियर पर अलग-अलग स्तरों पर सड़कें बनाई जा सकती हैं और इसके ऊपर मेट्रो कॉरिडोर जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकता है।

गडकरी ने यह भी बताया कि भारत ने मल्टी-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मलेशिया से संबंधित तकनीक हासिल की है। उनका तर्क है कि सीमित शहरी जमीन में कई स्तरों पर परिवहन ढांचा तैयार करके बढ़ते ट्रैफिक दबाव से निपटने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

भारत-अमेरिका सहयोग को लेकर भी बोले गडकरी

इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स में गडकरी ने भारत और अमेरिका के बीच तकनीक, उद्योग और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली इंजीनियर और उद्यमी हैं, जबकि अमेरिका के पास तकनीक और संसाधनों की मजबूत क्षमता है। दोनों देशों की क्षमताओं को एक साथ लाकर कारोबार और आर्थिक विकास के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

गडकरी ने उद्यमिता को रोजगार सृजन से जोड़ते हुए कहा कि निवेश और उद्योग को बढ़ावा देने के साथ नए रोजगार पैदा करना जरूरी है। उनके मुताबिक गरीबी की समस्या से निपटने के लिए पर्याप्त रोजगार अवसरों का निर्माण महत्वपूर्ण है।

इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी तकनीक पर भी फोकस

केंद्रीय मंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बैटरी की लागत में कमी आई है और लिथियम-आयन बैटरियों के अलावा सोडियम-आयन, जिंक-आयन और एल्युमिनियम-आयन जैसी तकनीकों पर भी काम हो रहा है।

गडकरी के संबोधन में परिवहन के साथ-साथ तकनीक और नवाचार को भारत के आर्थिक विकास से जोड़ने पर जोर दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने के लिए नई तकनीक को अपनाना जरूरी होगा।

22वें इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स में क्या हुआ?

Indo-American Chamber of Commerce (IACC) के वेस्ट इंडिया काउंसिल की ओर से आयोजित 22वें इंडो-अमेरिकन कॉरपोरेट एक्सीलेंस अवॉर्ड्स में कारोबार, उद्यमिता और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों से जुड़े उद्योग जगत के लोगों ने हिस्सा लिया। गडकरी इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम में कुल 13 पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी संबंधों, निवेश, नवाचार और आर्थिक सहयोग में योगदान देने वाली कंपनियों और उद्योग जगत की हस्तियों को सम्मानित करना था।

मुंबई ट्रैफिक पर गडकरी का बयान क्यों अहम?

गडकरी का खुद ट्रैफिक जाम में फंसना मुंबई की लंबे समय से चली आ रही शहरी परिवहन चुनौती की ओर भी ध्यान खींचता है। महानगर में सीमित सड़क स्थान, बढ़ता वाहन दबाव और पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ती निर्भरता के बीच भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर नई तकनीक और मल्टी-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विकल्पों पर चर्चा बढ़ रही है।

गडकरी का संदेश साफ था—पुराने समय में बनाई गई सड़क और फ्लाईओवर व्यवस्था ने उस दौर की जरूरत पूरी की, लेकिन बदलती आबादी, बढ़ते वाहन और नई तकनीक के दौर में मुंबई जैसे महानगरों को अगली पीढ़ी के इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

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