ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा- रूसी डीजल रिफाइनरियों पर हमले बंद करें, बताई वजह

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ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा- रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकें, डीजल की कमी से पूरी दुनिया परेशान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से रूस की तेल रिफाइनरियों और डीजल उत्पादन-वितरण से जुड़े अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने का आग्रह किया। आयरलैंड यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि इन हमलों की वजह से वैश्विक स्तर पर ईंधन की कमी पैदा हो रही है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

ट्रंप का यह बयान अमेरिका में डीजल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद आया है। शुक्रवार को अमेरिका में डीजल की औसत कीमत पहली बार 6 डॉलर प्रति गैलन के पार चली गई थी।

कैसे पैदा हुआ ईंधन संकट

यूक्रेन पिछले कई महीनों से लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के जरिये रूस के तेल और गैस उद्योग को निशाना बना रहा है, जिससे रूस की घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है और देश में पेट्रोल की किल्लत खड़ी हो गई है। इसके जवाब में रूस ने जुलाई में डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी थी, जिससे पहले से ही तंग वैश्विक बाजार में सप्लाई और घट गई। हालांकि, ईंधन संकट की एक बड़ी वजह ईरान के साथ जारी युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति में आई बाधा भी मानी जा रही है।

गौरतलब है कि यूक्रेन अपने रुख पर कायम है और उसका कहना है कि रूस का तेल उद्योग सीधे तौर पर मॉस्को के युद्ध अभियान को आर्थिक मदद और ईंधन मुहैया कराता है, इसलिए रिफाइनरियां एक वैध सैन्य लक्ष्य हैं। यानी दोनों पक्षों के बीच इन हमलों की वैधता को लेकर स्पष्ट मतभेद बना हुआ है।

ट्रंप ने जेलेंस्की से सीधे की बात

एक पत्रकार के यह पूछे जाने पर कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हालिया बातचीत के बाद उन्होंने जेलेंस्की से भी संपर्क किया, ट्रंप ने पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने जेलेंस्की से रूस पर हमले रोकने की अपील की है। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जेलेंस्की को एक काम करना होगा, उन्हें रूस में डीजल केंद्रों को नष्ट करना बंद करना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि हमले में अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है, लेकिन डीजल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला रोका जाना चाहिए क्योंकि इससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मौजूदा वैश्विक ईंधन संकट पूरी तरह मध्य-पूर्व की स्थिति के कारण नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध के घटनाक्रम से भी जुड़ा है। गौरतलब है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले बढ़ती डीजल-पेट्रोल कीमतें अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही हैं।

भारत पर भी पड़ रहा असर

रूस के हमलों के चलते प्रभावित हुई घरेलू रिफाइनिंग क्षमता की भरपाई के लिए रूस ने पेट्रोलियम उत्पादों का आयात बढ़ाया है। रूस ने इस साल अगस्त में रिकॉर्ड 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। ऊर्जा एवं स्वच्छ हवा शोध केंद्र (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत रही, जो दर्शाता है कि इस वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत भी रूस के साथ अपने ऊर्जा व्यापार में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

फिलहाल जेलेंस्की या यूक्रेनी प्रशासन की ओर से ट्रंप की इस अपील पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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