चोट से टेढ़ा हो गया था 13 साल के बच्चे का चेहरा, मुंह भी नहीं खुलता था; SN मेडिकल कॉलेज में सर्जरी से मिली नई जिंदगी

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संवार दिया चेहरा: चोट से टेढ़ा हो गया था जबड़ा, एसएन में हुई सर्जरी; अब पूरा खुलने लगा बालक का मुंह

आगरा: बचपन में लगी एक चोट ने कासगंज के 13 वर्षीय बालक का चेहरा धीरे-धीरे टेढ़ा कर दिया था। हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उसका मुंह महज एक अंगुली जितना ही खुल पाता था। खाने-पीने, चबाने और बोलने तक में परेशानी होने लगी थी। आखिरकार आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में उसकी सफल सर्जरी की गई और अब उसका चेहरा काफी हद तक सीधा हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस इलाज में निजी अस्पताल में एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो सकता था, वह यहां निशुल्क किया गया।

बचपन की चोट ने बदल दिया चेहरे का आकार

प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. पुनीत भारद्वाज के अनुसार, बालक को करीब 3-4 वर्ष की उम्र में जबड़े में गंभीर चोट लगी थी। चोट के बाद समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण जबड़े की हड्डी गलत तरीके से जुड़ने लगी।

धीरे-धीरे उसके चेहरे का आकार बिगड़ता चला गया और जबड़े की गति भी सीमित हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसका मुंह सामान्य रूप से खुलना बंद हो गया था।

चिकित्सकीय भाषा में इस समस्या को टेम्पोरोमैंडिबुलर ज्वाइंट एंकिलासिस (TMJ Ankylosis) कहा जाता है। इसमें जबड़े के जोड़ में असामान्य रूप से हड्डी या ऊतक जुड़ जाने के कारण मुंह खोलने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

सिर्फ एक अंगुली जितना खुलता था मुंह

परिजन जब बच्चे को बीते सप्ताह एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, तब डॉक्टरों ने उसकी स्थिति की जांच की। बच्चे का मुंह करीब एक अंगुली की चौड़ाई तक ही खुल पा रहा था।

इस वजह से उसे खाना चबाने और निगलने के साथ-साथ बोलने में भी परेशानी हो रही थी। लंबे समय से चेहरे में आए बदलाव के कारण उसकी शारीरिक बनावट भी प्रभावित हो गई थी।

ढाई घंटे से ज्यादा चली सर्जरी

डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन का फैसला किया। प्लास्टिक सर्जरी टीम ने जबड़े के जाम हो चुके हिस्से को खोलकर उसकी संरचना को ठीक किया। इसके लिए गैप आर्थोप्लास्टी और फ्लैप सर्जरी की तकनीक का इस्तेमाल किया गया।

ऑपरेशन ढाई घंटे से अधिक समय तक चला। सर्जरी के बाद बच्चे का चेहरा सीधा दिखाई देने लगा और उसका मुंह भी सामान्य तरीके से खुलने लगा।

अब वह पहले की तुलना में आसानी से खाना-पीना और बोल पा रहा है। हालत में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

निजी अस्पताल में एक लाख से ज्यादा खर्च

इस तरह की जटिल सर्जरी का खर्च निजी अस्पताल में एक लाख रुपये से अधिक हो सकता है। एसएन मेडिकल कॉलेज में यह ऑपरेशन निशुल्क किया गया।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनने के बाद संस्थान में कॉस्मेटिक और पुनर्निर्माण संबंधी सर्जरी की सुविधाएं भी उपलब्ध हो रही हैं।

ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. पुनीत भारद्वाज के साथ डॉ. प्रिया, डॉ. प्रीति भारद्वाज, डॉ. आकाश, डॉ. अभिषेक पंकज, डॉ. विकास, डॉ. पीयूषा और डॉ. अर्पिता शामिल रहे।

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