150 पाकिस्तानी दुल्हनें कैसे पहुंचीं भारत? ऑपरेशन सिंदूर के बाद बंद था वीजा, शादी के लिए अपनाया ये रास्ता

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150 पाकिस्तानी दुल्हनें भारत आईं, वीजा बैन के बाद कैसे पहुंचीं?

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें और उनके रिश्तेदार शादी के लिए भारत पहुंच चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए वीजा और अटारी-वाघा मार्ग पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। इसका सीधा असर उन पाकिस्तानी युवतियों पर पड़ा, जिनकी भारत में पहले ही सगाई हो चुकी थी और शादी की तारीख तय होने का इंतजार था।

लंबी कोशिशों और केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद इन महिलाओं को भारत आने के लिए वीजा जारी किया गया। हालांकि, इस बार उन्हें सीधे अटारी सीमा के रास्ते भारत आने की अनुमति नहीं मिली। इसके बजाय कई दुल्हनें मस्कट, दुबई, श्रीलंका और अन्य देशों के रास्ते हवाई मार्ग से भारत पहुंचीं।

भारत में हुई सगाई, फिर अचानक अटक गई शादी

सिंध प्रांत के कई परिवारों में लंबे समय से भारत में रहने वाले सिंधी परिवारों के साथ रिश्तेदारी और शादियों का सिलसिला रहा है। वाघा-अटारी बॉर्डर के जरिए आवाजाही अपेक्षाकृत आसान होने के कारण पाकिस्तानी परिवार अपनी बेटियों की शादी भारत में करते रहे हैं।

लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ा और इसके बाद वीजा तथा सीमा से जुड़ी पाबंदियों के कारण कई शादियां अटक गईं।

इनमें करीब 150 ऐसी पाकिस्तानी युवतियां शामिल थीं, जिनकी भारत में सगाई हो चुकी थी। उन्हें शादी के बाद अपने भारतीय परिवारों के साथ बसना था, लेकिन वीजा प्रतिबंधों के कारण वे भारत नहीं आ पा रही थीं।

आखिर कैसे भारत पहुंचीं पाकिस्तानी दुल्हनें?

नागपुर के सामुदायिक नेता राजेश झांबिया के मुताबिक, केंद्र सरकार से लगातार संपर्क और प्रयासों के बाद इन दुल्हनों और उनके रिश्तेदारों को भारत आने के लिए वीजा मिल सका।

हालांकि, सरकार की शर्त थी कि पाकिस्तान से आने वाले इन लोगों को हवाई मार्ग से भारत आना होगा।

इसके बाद कई दुल्हनें और उनके परिवार पाकिस्तान से निकलकर दुबई, मस्कट/ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों के रास्ते भारत पहुंचे। इस तरह सीधे भारत-पाकिस्तान सीमा पार करने के बजाय उन्होंने तीसरे देशों के जरिए अपनी यात्रा पूरी की।

नागपुर में ही 15 शादियों का मामला

झांबिया के अनुसार, अप्रैल 2026 से अब तक करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें और उनके परिवार शादी के सिलसिले में भारत पहुंच चुके हैं। इनमें नागपुर से जुड़े करीब 15 मामले शामिल हैं।

इनमें से कई शादियां नागपुर के अलावा रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के दूसरे शहरों में होनी हैं।

शदानी दरबार ने तैयार की दुल्हनों की सूची

वीजा दिलाने की प्रक्रिया में शदानी दरबार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित इस प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल से जुड़े आध्यात्मिक प्रमुख संत युधिष्ठिरलाल शदानी से संपर्क किया गया।

इसके बाद उन पाकिस्तानी युवतियों की सूची तैयार की गई, जिनकी भारत में सगाई हो चुकी थी और जिन्हें शादी के लिए भारत आना था। करीब 150 दुल्हनों और उनके परिवारों से जुड़ी जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजकर वीजा जारी करने का अनुरोध किया गया।

300 युवतियां अब भी भारत आने के इंतजार में

हालांकि, यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। राजेश झांबिया के मुताबिक पाकिस्तान में करीब 300 और युवतियां ऐसी हैं, जिनकी भारत में शादी होनी है और वे वीजा मिलने का इंतजार कर रही हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से इन युवतियों को भी मानवीय आधार पर भारत आने की अनुमति देने की अपील की है, ताकि लंबे समय से अटकी उनकी शादियां हो सकें।

पहलगाम हमले के बाद बदले थे भारत-पाक रिश्ते

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। इसी घटनाक्रम के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया।

वीजा और सीमा संबंधी प्रतिबंधों का असर उन आम परिवारों पर भी पड़ा, जिनके रिश्ते दोनों देशों के बीच वर्षों से जुड़े हुए थे। अब करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनों को विशेष अनुमति मिलने के बाद उनकी शादी की राह खुली है, लेकिन करीब 300 अन्य युवतियां अभी भी इसी इंतजार में हैं।

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