राहुल गांधी के धरने पर BJP का हमला, जेपी नड्डा बोले- ‘वंदे मातरम्’ विवाद से ध्यान भटकाने के लिए कर रहे ड्रामा

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संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर राहुल गांधी का धरना और जेपी नड्डा की प्रतिक्रिया

दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 21 अगस्त को दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया और जुलाई में घायल हुए छात्र साहिल लोचाब के मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। इस प्रदर्शन को लेकर बीजेपी ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इसे ‘ध्यान भटकाने वाली राजनीति’ बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ‘वंदे मातरम्’ विवाद में घिरने के बाद मुद्दे को बदलने की कोशिश कर रही है।

हालांकि, घटनाक्रम में बाद में अहम बदलाव हुआ। दिल्ली पुलिस ने 21 अगस्त को ही साहिल लोचाब की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली। रिपोर्टों के मुताबिक FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत दर्ज हुई और इसमें उस समय किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया था।

राहुल गांधी किस मांग को लेकर धरने पर बैठे?

राहुल गांधी 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए 19 वर्षीय साहिल लोचाब के साथ संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप था कि पुलिस मामले में FIR दर्ज नहीं कर रही है। इसके बाद राहुल गांधी पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और साहिल की आंख में गंभीर चोट आई। उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग भी की।

राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कांग्रेस के कई नेता भी प्रदर्शन में पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस स्टेशन के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया था।

जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप

राहुल गांधी के धरने पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने तीखा हमला किया। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का प्रदर्शन छात्रों के मुद्दे से ज्यादा मीडिया का ध्यान हासिल करने और कांग्रेस के सामने खड़े दूसरे राजनीतिक विवाद से ध्यान हटाने की कोशिश है।

नड्डा ने राहुल गांधी को ‘कैमराजीवी’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह ऐसी राजनीति कर रहे हैं जिसका उद्देश्य सुर्खियों में बने रहना है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मामले की जांच चल रही है और सुप्रीम कोर्ट की ओर से जांच के लिए समिति गठित की जा चुकी है, तब पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने की जरूरत क्यों पड़ी।

बीजेपी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर घिर चुकी है और जनता के सवालों का सामना कर रही है, इसलिए राहुल गांधी ने नया राजनीतिक मुद्दा उठाया है। यह नड्डा का राजनीतिक आरोप है, न कि किसी जांच एजेंसी द्वारा स्थापित तथ्य।

रविशंकर प्रसाद ने भी राहुल गांधी को घेरा

बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी के प्रदर्शन को ‘अराजकता की राजनीति’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना या अनुमति के पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठ गए।

रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि मामले की जांच पहले से चल रही है और सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई की घटना की जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी गठित की है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी का पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने का औचित्य क्या है।

हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि राहुल गांधी जिस FIR की मांग कर रहे थे, दिल्ली पुलिस ने बाद में साहिल लोचाब की शिकायत पर FIR दर्ज कर दी। इसलिए अब मामला FIR दर्ज होने के बाद की जांच और उसमें जिम्मेदारी तय करने पर केंद्रित है।

‘वंदे मातरम्’ विवाद से कैसे जुड़ा मामला?

बीजेपी के हमले की दूसरी बड़ी वजह कांग्रेस का ‘वंदे मातरम्’ को लेकर हालिया रुख है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने 19 अगस्त को तय किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। पार्टी ने इसके लिए 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव का हवाला दिया।

इस फैसले को लेकर बीजेपी कांग्रेस पर लगातार हमलावर है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस राष्ट्रीय गीत को लेकर ऐसा रुख अपना रही है जिससे पार्टी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसी विवाद के बीच राहुल गांधी के पुलिस स्टेशन पर धरने को बीजेपी नेताओं ने वंदे मातरम् विवाद से ध्यान हटाने की कोशिश बताया है।

दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि उसका रुख 1937 के ऐतिहासिक प्रस्ताव पर आधारित है और पार्टी ‘वंदे मातरम्’ का सम्मान करती है। इसलिए इस मुद्दे को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।

क्या राहुल गांधी के धरने के बाद FIR हुई?

यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण अपडेट है। राहुल गांधी के कई घंटे चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचाब की शिकायत पर FIR दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक FIR में BNS की धारा 118 और 125 लगाई गई हैं और किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। इसके बाद राहुल गांधी ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

इससे विवाद का अगला चरण अब जांच पर निर्भर करेगा। FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। कथित पैलेट गन के इस्तेमाल और जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

राहुल गांधी के प्रदर्शन पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। बीजेपी जहां राहुल गांधी के प्रदर्शन को राजनीतिक ड्रामा और ध्यान भटकाने की कोशिश बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे घायल छात्र के लिए न्याय और पुलिस जवाबदेही की लड़ाई के तौर पर पेश कर रही है।

वहीं, NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना हर व्यक्ति का अधिकार है। उन्होंने कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार ध्यान दे रही है और उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में अब दो राजनीतिक मुद्दे एक-दूसरे से जुड़ गए हैं—एक तरफ जुलाई के छात्र प्रदर्शन में कथित पैलेट गन इस्तेमाल की जांच, और दूसरी तरफ ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ता विवाद। दोनों मुद्दों पर आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

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