आगरा में एंटी रैबीज वैक्सीन को लेकर फिर संकट! 400 मरीजों की रोज जरूरत, अस्पताल में सिर्फ 150 वाइल का स्टॉक

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UP: आगरा में एंटी रैबीज वैक्सीन का संकट, जरूरत 400 वाइल की; जिला अस्पताल में सिर्फ 150 उपलब्ध

आगरा। कुत्ते या बंदर के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन (ARV) लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे सैकड़ों मरीजों की चिंता अभी खत्म नहीं हुई है। आगरा जिला अस्पताल में रोजाना 400 से अधिक मरीज एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि अस्पताल के पास फिलहाल करीब 150 वाइल ही उपलब्ध हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका है।

300 वाइल मिलीं, जिला अस्पताल को सिर्फ 100

स्वास्थ्य विभाग को मंगलवार को एंटी रैबीज वैक्सीन की 300 वाइल मिलीं। इनमें से सिर्फ 100 वाइल जिला अस्पताल को दी गईं, जबकि बाकी 200 वाइल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को भेजी गई हैं।

जिला अस्पताल में पहले से करीब 50 वाइल उपलब्ध थीं। नई 100 वाइल मिलने के बाद कुल स्टॉक लगभग 150 वाइल हुआ है। लेकिन अस्पताल में प्रतिदिन 400 से अधिक मरीजों के पहुंचने के कारण यह स्टॉक लंबे समय तक चलने वाला नहीं है।

शनिवार को मिली थीं 1,500 वाइल

इससे पहले एआरवी का स्टॉक खत्म होने के बाद शनिवार को स्वास्थ्य विभाग को 1,500 वाइल मिली थीं। इनमें से 400 वाइल जिला अस्पताल और 1,100 वाइल विभिन्न सीएचसी को भेजी गई थीं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन की एक वाइल से चार मरीजों को इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके बावजूद मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

शासन से मांगी गईं 5,000 वाइल

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि शासन से कुल 5,000 वाइल की मांग की गई है। फिलहाल इनमें से 300 वाइल प्राप्त हुई हैं। इनमें 100 जिला अस्पताल और 200 सीएचसी को भेजी गई हैं।

सीएमओ के मुताबिक वैक्सीन की आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी और स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

रेबीज के मामले में वैक्सीन टालना नहीं चाहिए

रेबीज एक गंभीर और लगभग हमेशा घातक बीमारी है, लेकिन समय पर उचित पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PEP) मिलने से संक्रमण को रोका जा सकता है। इसलिए किसी संदिग्ध संक्रमित जानवर के काटने या खरोंचने के बाद चिकित्सा सलाह लेना और निर्धारित उपचार समय पर शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार केवल वैक्सीन ही नहीं, बल्कि घाव की तत्काल और सही तरीके से सफाई तथा जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) का इस्तेमाल भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल

सरकार की ओर से अतिरिक्त वैक्सीन की आपूर्ति का भरोसा दिया गया है, लेकिन जिला अस्पताल की मौजूदा जरूरत और उपलब्ध स्टॉक में बड़ा अंतर बना हुआ है। रोजाना 400 से ज्यादा मरीजों के मुकाबले करीब 150 वाइल का स्टॉक कितने समय तक चलेगा, यही फिलहाल सबसे बड़ा सवाल है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई खेप चरणबद्ध तरीके से मिलती रहेगी। अब देखना होगा कि अगली आपूर्ति समय पर पहुंचती है या नहीं, ताकि कुत्ते और अन्य जानवरों के काटने के बाद वैक्सीन के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को वापस न लौटना पड़े।

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