नई दिल्ली: भारत की सरकारी तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के लिए वेनेजुएला से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। कंपनी को अमेरिकी वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से वेनेजुएला में अपने तेल कारोबार से जुड़े कामकाज को फिर से पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित ONGC के वेनेजुएला ऑपरेशन्स के सामने खड़ी बड़ी अड़चन दूर होती दिख रही है।
ONGC के वित्त निदेशक अनुपम अग्रवाल ने कंपनी के पहली तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों के साथ बातचीत में बताया कि अमेरिकी मंजूरी के बाद कंपनी को वेनेजुएला की परियोजनाओं में काम करने की ज्यादा स्वतंत्रता मिल गई है। इससे वहां उत्पादन बढ़ाने और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
सैन क्रिस्टोबल में ONGC की 40 फीसदी हिस्सेदारी
ONGC की विदेशी निवेश शाखा ONGC Videsh (OVL) की वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के पास है।
इसके अलावा OVL की Carabobo-1 परियोजना में भी भारतीय कंपनियों के साथ हिस्सेदारी है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक इस परियोजना में भारतीय पक्ष की कुल हिस्सेदारी करीब 18 फीसदी है।
अब अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम कम होने के बाद ONGC इन परियोजनाओं में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
अटका हुआ सैकड़ों करोड़ का पैसा भी निकलने की उम्मीद
वेनेजुएला में ONGC के लिए सिर्फ तेल उत्पादन बढ़ाने का रास्ता ही नहीं खुला है, बल्कि वहां लंबे समय से अटके डिविडेंड और अन्य वित्तीय दावों की वसूली की उम्मीद भी बढ़ी है।
ONGC के वित्तीय दस्तावेजों में वेनेजुएला की परियोजनाओं से जुड़े बकाया डिविडेंड का उल्लेख पहले भी किया गया है। सितंबर 2025 तक ONGC की सहायक कंपनी से जुड़े एक बकाया डिविडेंड की राशि करीब 4,758 करोड़ रुपये बताई गई थी।
कंपनी अब वेनेजुएला के अधिकारियों और अपने संयुक्त उपक्रम साझेदारों के साथ इन परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय और परिचालन मामलों पर बातचीत कर रही है।
अब उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
प्रतिबंधों और निवेश की कमी के कारण वेनेजुएला की कई तेल परियोजनाएं अपनी संभावित क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। ONGC का मानना है कि मौजूदा परियोजनाओं में निवेश और परिचालन गतिविधियां बढ़ाकर उत्पादन में सुधार किया जा सकता है।
कंपनी वेनेजुएला में कुछ परियोजनाओं का ऑपरेशनल कंट्रोल अपने हाथ में लेने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ONGC वेनेजुएला के साथ नए समझौतों को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है।
OFAC की मंजूरी क्यों है इतनी अहम?
वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच वहां तेल की खोज, उत्पादन और निवेश से जुड़ी गतिविधियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था महत्वपूर्ण रही है। OFAC ने 2026 में वेनेजुएला के तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़ी कई गतिविधियों के लिए अलग-अलग जनरल लाइसेंस जारी और संशोधित किए हैं।
मसलन, General License 50A के तहत निर्धारित संस्थाओं के लिए वेनेजुएला के तेल एवं गैस क्षेत्र से जुड़े कई लेनदेन, मौजूदा गतिविधियों के विस्तार, नई खोज और उत्पादन गतिविधियों तथा संबंधित भुगतान को कुछ शर्तों के साथ अधिकृत किया गया था। बाद में इसे 50B के रूप में संशोधित किया गया।
इसलिए ONGC के लिए मिली मंजूरी केवल औपचारिक राहत नहीं है, बल्कि वेनेजुएला में उसके निवेश और परिचालन को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है।
दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में वेनेजुएला
वेनेजुएला ONGC के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल भंडार हैं। लेकिन वर्षों से कम निवेश, अमेरिकी प्रतिबंधों और परिचालन संबंधी समस्याओं ने वहां तेल उत्पादन क्षमता पर असर डाला है।
अब बदलते प्रतिबंध वातावरण और ONGC को मिली परिचालन स्वतंत्रता के बीच कंपनी के सामने पुरानी परियोजनाओं को गति देने, उत्पादन बढ़ाने और अटके वित्तीय संसाधनों को वापस हासिल करने का अवसर है।
यानी आने वाले महीनों में नजर इस बात पर रहेगी कि ONGC वेनेजुएला में अपनी परियोजनाओं का उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ाती है और लंबे समय से अटके भुगतान की वसूली में उसे कितनी सफलता मिलती है।

