अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को अहम बैठक शुरू हो गई है। बैठक मणिरामदास छावनी में हो रही है और इसमें राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) के चयन पर सबसे अहम चर्चा होने की उम्मीद है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय का नाम इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला ट्रस्ट की बैठक में ही होगा।
बैठक को लेकर अयोध्या में पहले से ही हलचल थी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों और ट्रस्टियों के पहुंचने के साथ ही सीईओ की नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। ट्रस्ट की ओर से इससे पहले सीईओ के चयन के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने अपनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है। अब ट्रस्ट इन नामों पर विचार कर अंतिम निर्णय लेगा।
राजेश पांडेय का नाम सबसे आगे क्यों?
सीईओ पद की चर्चा में पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास लंबा पुलिस और प्रशासनिक अनुभव है। वह उत्तर प्रदेश पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और यूपी एसटीएफ के संस्थापक सदस्यों में भी रहे हैं।
राजेश पांडेय की प्रोफाइल का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका मंदिर प्रशासन से जुड़ा अनुभव भी है। वह लखनऊ के अलीगंज स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव हैं। वर्ष 2022 में उन्हें मंदिर संचालन के लिए गठित ट्रस्ट का सचिव बनाया गया था। बाद की रिपोर्टों में भी उन्हें ट्रस्ट के सचिव के तौर पर मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े मामलों में सक्रिय बताया गया है।
राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी केवल कार्यालयी प्रशासन तक सीमित नहीं होगी। मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच दर्शन व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी विभागों के साथ समन्वय, वीआईपी एवं आम श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं तथा मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स की निगरानी जैसी जिम्मेदारियां महत्वपूर्ण होंगी। ऐसे में प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परेश सक्सेना और अन्य नाम भी चर्चा में
राजेश पांडेय के अलावा बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. परेश सक्सेना और पूर्व आईएएस योगेश्वर राम मिश्रा के नाम भी अंतिम चरण के संभावित उम्मीदवारों में सामने आए हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार तीन प्रमुख नामों में राजेश पांडेय, योगेश्वर राम मिश्रा और परेश सक्सेना शामिल बताए गए हैं। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टों में पैनल के नामों को लेकर अलग जानकारी दी गई है। इसलिए ट्रस्ट की आधिकारिक घोषणा से पहले किसी पैनल को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
योगेश्वर राम मिश्रा अयोध्या-फैजाबाद क्षेत्र में जिलाधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं। वहीं परेश सक्सेना का लंबा पुलिस प्रशासनिक अनुभव उन्हें भी इस पद के लिए प्रमुख दावेदारों में रखता है।
5,000 से ज्यादा आवेदन, अब एक नाम पर लगेगी मुहर
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक सीईओ के चयन की प्रक्रिया काफी व्यापक रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस पद के लिए 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के कई चरणों के बाद चयन प्रक्रिया अंतिम तीन नामों तक पहुंची है। सर्च कमेटी की रिपोर्ट अब ट्रस्ट के पास है और अंतिम निर्णय ट्रस्ट बोर्ड को करना है।
सीईओ की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को और व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है। बैठक में अन्य रिक्त पदों, ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक मामलों और मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
अंतिम फैसला ट्रस्ट का
फिलहाल राजेश पांडेय का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में चर्चा में है, लेकिन यह नियुक्ति तभी अंतिम मानी जाएगी जब ट्रस्ट औपचारिक रूप से इसकी घोषणा करेगा। इसलिए बैठक पूरी होने और आधिकारिक निर्णय सामने आने तक सीईओ के नाम को लेकर किसी भी दावे को संभावित चयन के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

