बरेली: मत्स्य अधिकारी बनकर मछली पालकों से वसूली करने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार

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बरेली: मत्स्य अधिकारी बनकर मछली पालकों से वसूली करने वाले गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार

बरेली में मछली पालकों को प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालने की धमकी देकर वसूली करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इज्जतनगर के करमपुर चौधरी निवासी आजम और भोजीपुरा थाना क्षेत्र के घंघोरा घंघोरी निवासी साजिद के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, अब तक दो लाख रुपये से अधिक की वसूली के प्रमाण मिल चुके हैं।

कैसे हुआ खुलासा

मामले का खुलासा तब हुआ जब भोजीपुरा थाना क्षेत्र के सालिम रजा ने 11 सितंबर को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। सालिम ने बताया कि वह मछली पालक हैं और अगस्त में इन आरोपियों ने खुद को मत्स्य अधिकारी बताकर उन्हें धमकाया और उनसे 70,000 रुपये वसूल लिए। इसी तरह देवरनियां थाना क्षेत्र में प्यारेलाल नामक एक अन्य मछली पालक से छह सितंबर को 13,000 रुपये वसूले जाने का मामला भी सामने आया।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य पीड़ितों से नकद के अलावा ऑनलाइन तरीके से भी रुपये वसूलते थे, जिनके स्क्रीनशॉट जांच के दौरान पुलिस को मिले हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य कभी खुद को पत्रकार तो कभी मत्स्य विभाग का अधिकारी बताकर तालाबों पर पहुंचते थे और पीड़ितों से करीब 5,000 से 20,000 रुपये तक की रकम ऐंठते थे। आरोपियों के पास से फर्जी प्रेस पहचान पत्र और मत्स्य विभाग से जुड़े जाली दस्तावेज भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

असली और थाई मांगुर में मामूली फर्क, गिरोह ने उठाया फायदा

एसपी उत्तरी ने बताया कि बाजार में देसी मांगुर मछली की काफी मांग है, जिसकी कीमत करीब 1,000 रुपये प्रति किलो तक होती है, जबकि थाई मांगुर मछली महज 80 से डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो में बिकती है। थाई मांगुर मछली की प्रजाति भारत में प्रतिबंधित है, लेकिन दोनों प्रजातियों में दिखने में मामूली अंतर होने के कारण सामान्य लोग अक्सर पहचान करने में चूक जाते हैं। गिरोह इसी असमंजस का फायदा उठाकर मछली पालकों को थाई मांगुर पालने के आरोप में फंसाने की धमकी देकर वसूली करता था।

मत्स्य विभाग में सीमित स्टाफ बना मददगार बहाना

एसपी उत्तरी ने बताया कि जब मत्स्य निरीक्षक बनकर धमकाने और वसूली करने की शिकायतें मिलनी शुरू हुईं, तो उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य गायत्री पांडेय से संपर्क किया। इस दौरान पता चला कि पूरे विभाग में सिर्फ एक निरीक्षक और कुल चार-पांच कर्मचारी ही तैनात हैं, जिसके बाद आरोपियों पर शिकंजा कसा जा सका। पुलिस के अनुसार, आरोपी आजम पहले किसी न्यूज पोर्टल में मीडियाकर्मी के तौर पर भी काम कर चुका है।

अन्य आरोपी भी गिरोह में शामिल, तलाश जारी

एसपी उत्तरी के मुताबिक, करमपुर गांव निवासी रिजवान, कासगंज के मोहल्ला जयराम शहर गेट निवासी बसंत शर्मा और अरविंद भी इस गिरोह में शामिल बताए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि गिरोह के सदस्य मिलकर पीड़ितों को मछली पालन को लेकर कार्रवाई, मुकदमे में फंसाने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रकम मांगते थे।

पुलिस ने भोजीपुरा थाने में साजिद और चार अन्य के खिलाफ, जबकि देवरनियां थाने में आजम के खिलाफ अलग से मामला दर्ज किया है। आरोपी आजम के खिलाफ पहले से दहेज उत्पीड़न सहित अन्य मामले भी दर्ज हैं। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत ने जेल भेज दिया है। पुलिस अब गिरोह के तीन अन्य फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है।

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