ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों फिलिप व टिमोथी की 1999 में हुई हत्या के दोषी रवींद्र पाल उर्फ दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की मांग ओडिशा के स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SSRB) ने खारिज कर दी है। बोर्ड ने 31 अगस्त को हुई एक विशेष बैठक में यह फैसला लिया। बोर्ड का यह फैसला ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 17 सितंबर को होनी है। कोर्ट ने पहले ओडिशा सरकार को निर्देश दिया था कि वह दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की याचिका पर स्पष्ट रुख अपनाए।
क्या था मामला
22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक चर्च के बाहर खड़ी स्टेशन वैगन में सो रहे ग्राहम स्टेन्स और उनके दोनों बेटों को जिंदा जला दिया गया था। इस मामले में दारा सिंह और उसके सहयोगी महेंद्र हेम्ब्रम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि 11 अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया था। इस मामले ने देश-दुनिया में व्यापक निंदा को जन्म दिया था और यह भारत में सांप्रदायिक हिंसा के एक प्रतीकात्मक मामले के तौर पर चर्चित रहा। ग्राहम स्टेन्स की पत्नी ग्लैडिस स्टेन्स घटना के बाद भी भारत में ही रहीं और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर क्षमा और सुलह की बात कई बार कही है।
26 साल से जेल में है दारा सिंह
अब लगभग 67 साल के दारा सिंह करीब 26 साल से जेल में बंद हैं। उन्होंने ओडिशा की 2022 की रिमिशन गाइडलाइंस के तहत समय से पहले रिहाई की मांग की थी। बोर्ड ने अपनी बैठक में मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद कहा कि “कुछ तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, बोर्ड फिलहाल उसकी समय से पहले रिहाई की सिफारिश करने के पक्ष में नहीं है।”
गौरतलब है कि क्योंझर जिला प्रशासन ने बीते साल मार्च में कुछ शर्तों के साथ दारा सिंह की रिहाई पर सशर्त सिफारिश दी थी, जिसमें सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की शर्तें शामिल थीं। हालांकि बोर्ड के सामने क्योंझर प्रशासन की एक ताजा रिपोर्ट भी रखी गई, जिसके मुताबिक 15 अगस्त को करीब 200-250 लोग, जो कथित तौर पर ‘दारा सेना’ से जुड़े बताए गए, दारा सिंह की प्रस्तावित रिहाई को लेकर क्योंझर जिला जेल के बाहर जमा हुए थे और उत्तेजक नारेबाजी की गई थी। हालांकि इस रिपोर्ट में कोई ठोस सिफारिश नहीं थी और इसे अनिर्णायक बताया गया, फिर भी बोर्ड ने इसे अपने विचार में शामिल किया।
दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की मांग इससे पहले भी कई बार खारिज हो चुकी है — 24 नवंबर 2016, 24 जून 2019, 24 दिसंबर 2020, तथा 2022 और 2023 में भी उनकी याचिकाएं ठुकराई जा चुकी हैं। इन सभी मामलों में सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक शांति को लेकर चिंताएं जताई गई थीं।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा
दारा सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए मांग की थी कि ओडिशा सरकार को उनकी समय से पहले रिहाई की याचिका पर 2022 की रिमिशन नीति के तहत विचार करने का निर्देश दिया जाए। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार द्वारा लंबे समय तक फैसला न लेने पर सख्त रुख अपनाते हुए ओडिशा सरकार को स्पष्ट निर्णय लेने को कहा था। अब स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद यह फैसला 17 सितंबर को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा जाएगा। अदालत इस दौरान दारा सिंह की जेल में बिताई गई अवधि, याचिका के लंबित रहने में हुई प्रशासनिक देरी और बोर्ड के फैसले, इन सभी पहलुओं की समीक्षा कर सकती है। स्पष्ट है कि समय से पहले रिहाई कोई स्वतः मिलने वाला अधिकार नहीं है, और अंतिम फैसला अब सर्वोच्च अदालत के हाथ में है।

