जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा: 6 साल बाद आर्मी चीफ का मॉस्को दौरा, जानें पूरा एजेंडा

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थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ आज से रूस दौरे पर, छह साल बाद किसी आर्मी चीफ की मॉस्को यात्रा

भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 से 18 सितंबर 2026 तक रूस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि छह साल में यह पहला मौका है जब कोई भारतीय थल सेनाध्यक्ष रूस के दौरे पर गया है। इससे पहले अक्टूबर 2018 में दिवंगत जनरल बिपिन रावत ने आर्मी चीफ के तौर पर मॉस्को की यात्रा की थी। जनरल सेठ के इस दौरे का मकसद भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों और सैन्य सहयोग को नई गति देना है।

रूसी थल सेना प्रमुख के साथ अहम बैठक

अपने दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ मॉस्को में गार्ड ऑफ ऑनर प्राप्त करेंगे और ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देंगे। इसके बाद वह रूस की लैंड फोर्सेज के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव से मुलाकात करेंगे, जिसमें पेशेवर सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण और आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा जनरल सेठ मॉस्को स्थित नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा करेंगे और रक्षा उद्योग व खरीद से जुड़े रूसी उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव समेत वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।

यात्रा के अगले चरण में जनरल सेठ सेंट पीटर्सबर्ग जाएंगे, जहां वह मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का दौरा कर वहां के नेतृत्व और फैकल्टी से बातचीत करेंगे।

पुराने रूसी हथियारों के रखरखाव पर रहेगा फोकस

रिपोर्टों के मुताबिक, इस यात्रा के केंद्र में भारतीय सेना के पास मौजूद बड़े पैमाने के रूसी मूल के हथियारों और उपकरणों के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति और उन्नयन से जुड़े मुद्दे रहने की संभावना है। भारतीय थल सेना की आर्म्ड कोर और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री का बड़ा हिस्सा आज भी रूसी मूल के प्लेटफॉर्म पर निर्भर है, जिनके लिए स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता लंबे समय से एक अहम मुद्दा रही है। चर्चा में एयर डिफेंस सिस्टम पेंटसिर-S1M, बीएमपी-3 इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल और भविष्य के मुख्य युद्धक टैंक कार्यक्रम (FRCV) से जुड़ी रूसी तकनीक जैसे विषय भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि इन पर कोई अंतिम फैसला भारत की स्वदेशीकरण नीति और तकनीकी हस्तांतरण की शर्तों पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि इस साल मार्च में भारत ने रूसी मूल के तुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के उन्नयन और रखरखाव के लिए 445 करोड़ रुपये का अनुबंध भी किया था।

कूटनीतिक संदर्भ भी अहम

जनरल सेठ की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और रूस के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। इससे पहले अगस्त में विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतूरोव से मुलाकात की थी। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ब्रिक्स सम्मेलन के इतर होने वाले 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मॉस्को आने का न्योता भी दिया है। इस दौरे से पहले जनरल सेठ नेपाल की चार दिवसीय यात्रा पर भी जा चुके हैं।

कुल मिलाकर, जनरल धीरज सेठ की यह यात्रा भारत-रूस सैन्य कूटनीति और आर्मी-टू-आर्मी संबंधों को दिए जा रहे महत्व को दर्शाती है। भारत जहां एक तरफ रक्षा खरीद में स्वदेशीकरण और विविधीकरण पर जोर दे रहा है, वहीं मौजूदा रूसी मूल के हथियारों का रखरखाव भी आने वाले वर्षों तक सेना की परिचालन तैयारी के लिए जरूरी बना रहेगा। इस दौरे से दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग गहरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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