बरेली: फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने के मामले में अब महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एक लिपिक का नाम सामने आया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय में तैनात क्लर्क देवप्रकाश फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा का करीबी था और छात्रों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके जरिए ठगी करवाता था। मामले में बारादरी थाने में उसके खिलाफ एक और रिपोर्ट दर्ज की गई है।
शाहजहांपुर निवासी पुष्पेंद्र की शिकायत के मुताबिक, उन्होंने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध पुवायां के एक महाविद्यालय से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की थी। इसी दौरान उनकी पहचान विश्वविद्यालय में लिपिक पद पर तैनात देवप्रकाश से हुई।
क्लर्क ने बताया- विप्रा शर्मा लगवा देंगी सरकारी नौकरी
पुष्पेंद्र का आरोप है कि देवप्रकाश ने उन्हें बताया कि उसका संपर्क आईएएस अधिकारी डॉ. विप्रा शर्मा से है और वह रुपये लेकर सरकारी नौकरी लगवा सकती हैं। उसे यह भरोसा भी दिलाया गया कि अगर नौकरी नहीं लगी तो पैसे वापस करा दिए जाएंगे।
इसके बाद देवप्रकाश पुष्पेंद्र को ग्रीन पार्क स्थित विप्रा शर्मा के घर ले गया। आरोप है कि यहां राजस्व विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर सात लाख रुपये ले लिए गए।
बाद में पुष्पेंद्र को कथित तौर पर पता चला कि देवप्रकाश और विप्रा शर्मा अपने गिरोह के अन्य लोगों के साथ मिलकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करते हैं।
कई और लोगों को बनाया कथित तौर पर शिकार
शिकायतकर्ता का कहना है कि देवप्रकाश ने कई अन्य लोगों को भी इसी तरह अपने जाल में फंसाया। वह लोगों को यह बताता था कि विप्रा शर्मा ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की है और उसके प्रभावशाली संपर्क हैं।
देवप्रकाश के खिलाफ पहले भी रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। अब एक बार फिर बारादरी थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। लगातार नाम सामने आने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि उसे फिलहाल विश्वविद्यालय के कृषि संकाय में भेज दिया गया है।
नौकरी के नाम पर चार लाख रुपये, फिर थमा दिया फर्जी नियुक्ति पत्र
वहीं, संजय नगर निवासी अरविंद कुमार ने भी विप्रा शर्मा के खिलाफ बारादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। अरविंद के मुताबिक, वह एक कपड़े की दुकान पर काम करते थे और वहीं उनकी मुलाकात विप्रा से हुई थी।
आरोप है कि विप्रा ने उन्हें फोन करके गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित अपने घर बुलाया और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर चार लाख रुपये लिए। इसके बाद उन्हें एक कथित फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिया गया।
जब अरविंद नियुक्ति पत्र में दिए गए स्थान शाहजहांपुर पहुंचे तो उन्हें फर्जीवाड़े की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की और अब मामले में FIR दर्ज की गई है।
करीब 36 मुकदमों तक पहुंचा मामला
फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा के खिलाफ लगातार नई शिकायतें सामने आ रही हैं। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या अब करीब 36 तक पहुंच गई है। इनमें बड़ी संख्या बारादरी थाने में दर्ज मामलों की है।
कई मामलों में विप्रा शर्मा के साथ उसके पिता, बहनोई और कथित गुर्गों को भी आरोपी बनाया गया है। विप्रा और उसकी दो बहनों के जेल में होने की बात सामने आई है, जबकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई जारी है।
पुलिस बोली- किसी आरोपी को नहीं छोड़ा जाएगा
एसपी सिटी मानुष पारीक के मुताबिक, विप्रा शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ लगातार नई शिकायतें मिल रही हैं और तथ्यों के आधार पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और संपत्ति जब्ती की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि फर्जी नौकरी के इस कथित नेटवर्क से जुड़े किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

