हाथरस: सिकंदराराऊ के करीब पांच साल पुराने किशोरी से दुष्कर्म के मामले में हाथरस की विशेष पॉक्सो अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश निर्भय नारायण राय (पॉक्सो प्रथम) की अदालत ने मुख्य अभियुक्त बाल अपचारी को 20 साल के कठोर कारावास और 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में सहयोग करने वाले तीन अन्य अभियुक्तों को भी अलग-अलग धाराओं में कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।
कोचिंग जाते समय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गए थे
अभियोजन के अनुसार, घटना 19 मार्च 2021 को सिकंदराराऊ कस्बे में हुई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि किशोरी को उसकी सहपाठी यशिता बहला-फुसलाकर अशोक के खाली मकान में ले गई। वहां पहले से सचिन, अशोक और एक बाल अपचारी मौजूद थे।
आरोप के मुताबिक, किशोरी को कमरे में बंद कर दिया गया। इसके बाद बाल अपचारी ने जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता को शाम तक कमरे में बंद रखा गया। घर पहुंचने के बाद किशोरी ने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उसकी मां ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
आठ गवाहों ने अदालत में दी गवाही
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान पीड़िता, उसकी मां, प्रधानाचार्य और चिकित्सक समेत कुल आठ गवाह पेश किए।
अदालत ने गवाहों के बयान और पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर चारों अभियुक्तों को दोषी माना। अदालत के समक्ष पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में माना गया।
मुख्य अभियुक्त को पॉक्सो एक्ट में 20 साल की सजा
अदालत ने 16 वर्ष से अधिक आयु के बाल अपचारी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 342 और 506 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(2) के तहत दोषी माना। पॉक्सो एक्ट के तहत उसे 20 साल के कठोर कारावास और 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
मामले में सहयोग करने वाले सचिन कुमार, अशोक कुमार और सहपाठी किशोरी यशिता को छह महीने के कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं आपराधिक धमकी से संबंधित धारा 506 में तीनों को एक साल के कारावास और 1,500 रुपये अर्थदंड की सजा दी गई।
स्कूल रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट से तय हुई पीड़िता की उम्र
अदालत के समक्ष पीड़िता की उम्र को लेकर भी साक्ष्य पेश किए गए। स्कूल रजिस्टर और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर घटना के समय उसकी उम्र 14 वर्ष चार माह मानी गई।
अदालत ने पॉक्सो कानून की धाराओं 29 और 30 के तहत लागू वैधानिक उपधारणाओं का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, अभियुक्तों की ओर से अपने बचाव में ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जो अभियोजन के मामले को खारिज करने के लिए पर्याप्त हों।
पीड़िता का बयान रहा अहम साक्ष्य
अदालत ने पीड़िता के बयान को विश्वसनीय और सुसंगत माना। यौन अपराधों के मामलों में पीड़िता की गवाही के महत्व को रेखांकित करते हुए अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
मामले में फैसला करीब पांच साल बाद आया है। अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद अब दोषसिद्ध अभियुक्तों को आदेश के अनुसार दंड भुगतना होगा।

