जनपद में असंतुलित खाद के प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है, जिससे पोषक तत्वों की कमी और उत्पादन प्रभावित हो रहा है। आगरा क्षेत्र की मृदा का पीएच 7.8 से 8.5 के बीच है, जिससे जिंक, लोहा और फास्फोरस जैसे आवश्यक तत्व पौधों को पर्याप्त नहीं मिल पाते। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के मृदा विशेषज्ञ संदीप सिंह ने किसानों को मृदा परीक्षण कराने व संतुलित उर्वरक के इस्तेमाल की सलाह दी।
उनकी सलाह पर एत्मादपुर के किसान लाखन सिंह त्यागी ने मृदा परीक्षण से गेहूं उत्पादन में 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर दो एकड़ खेत में गेहूं की फसल के लिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे लागत भी घटी।

