लखीमपुर खीरी। जिले में अंतिम संस्कार के प्रमुख स्थलों यानी मुक्तिधामों की स्थिति लंबे समय से खराब बनी हुई है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक कई मुक्तिधाम रखरखाव, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति शहर से सटे ग्राम पंचायत लखीमपुर देहात के घोसियाना-सुआगाड़ा स्थित मुक्तिधाम की बताई जा रही है, जहां जर्जर चबूतरों और लटकती छतों के बीच लोगों को अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान यहां हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
घोसियाना-सुआगाड़ा का मुक्तिधाम उल्ल नदी के किनारे बना है और शहर में होने वाले अंतिम संस्कारों का यह प्रमुख स्थल है। उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार, शहर के करीब 80 प्रतिशत अंतिम संस्कार इसी मुक्तिधाम में होते हैं। यह स्थल ट्रस्ट के संचालन में बताया जाता है और व्यवस्थाओं के लिए दान से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल किया जाता है।
मुक्तिधाम का निर्माण और सौंदर्यीकरण तत्कालीन विधायक डॉ. कौशल किशोर के कार्यकाल में कराया गया था। समय-समय पर मिलने वाली सहयोग राशि से यहां व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही जाती है, लेकिन नियमित देखरेख और जिम्मेदारी के अभाव में परिसर की हालत लगातार खराब होती गई।
15 चबूतरों में पांच-छह ही ठीक
मुक्तिधाम में शवदाह के लिए करीब 15 चबूतरे बने हुए हैं, लेकिन इनमें से केवल पांच-छह ही ठीक स्थिति में बताए जा रहे हैं। यहां प्रतिदिन औसतन पांच से सात शवों का अंतिम संस्कार होने की जानकारी दी गई है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का कमजोर होना चिंता का विषय है।
सबसे बड़ा खतरा कई चबूतरों की जर्जर छतों से है। कुछ छतें सरियों के सहारे टिकी हुई बताई गई हैं। बारिश के मौसम में इनके नीचे लोगों की मौजूदगी हादसे की आशंका को और बढ़ा देती है।
स्थानीय निवासी पैकरमा के मुताबिक, चबूतरों के ऊपर लगी छतें काफी समय से कमजोर हैं। अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं, इसलिए किसी भी समय हादसा होने का डर बना रहता है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
स्नानघर और शौचालय पर ताला, लोगों को परेशानी
मुक्तिधाम में लोगों की सुविधा के लिए सार्वजनिक स्नानघर और शौचालय भी बनाए गए हैं, लेकिन इनके बंद रहने की शिकायत है। बताया गया कि इन पर अक्सर ताला लगा रहता है। इससे अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए भी परिसर से बाहर जाना पड़ता है।
झाड़ियों से सांप-बिच्छू का खतरा
मुक्तिधाम परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। कई हिस्सों में झाड़ियां बढ़ जाने के कारण रास्ते तक स्पष्ट दिखाई नहीं देते। इससे अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को परेशानी होती है और सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बना रहता है।
घोसियाना-सुआगाड़ा मुक्तिधाम से जुड़े माली हरीनाम वर्मा ने साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था की जरूरत बताई। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि जब आते हैं तो सफाई की बात होती है, लेकिन बाद में स्थिति फिर जस की तस हो जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी मुक्तिधामों की स्थिति खराब
समस्या केवल शहर के प्रमुख मुक्तिधाम तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई जगह अंतिम संस्कार के लिए बने स्थलों की हालत खराब होने के कारण लोगों को वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है।
बेलरायां के भिडोरी गांव में वर्ष 2010 में मुक्तिधाम बनाया गया था। अब वहां हैंडपंप, गेट और टीनशेड जैसी जरूरी सुविधाओं के नदारद होने तथा परिसर में झाड़ियां उग आने की बात सामने आई है। इसके चलते ग्रामीण रेलवे की जमीन, खेत-खलिहान और नदी किनारे अंतिम संस्कार करने को मजबूर होने की बात कह रहे हैं।
मोहम्मदी क्षेत्र के केहुआ, बेलहरा दुवाहा और वेला गांवों में भी ग्रामीणों द्वारा अपने खेतों में अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी दी गई है। बारिश के दौरान खेतों में अंतिम संस्कार करना लोगों के लिए और मुश्किल हो जाता है।
खीरी और ओयल के मुक्तिधाम भी बदहाल
कस्बा खीरी स्थित चोरही बगिया मुक्तिधाम में भी व्यवस्थाएं बेहतर नहीं हैं। यहां एक टीनशेड जर्जर बताया गया है, जबकि दूसरे टीनशेड पर कथित तौर पर एक अघोरी के रहने की बात सामने आई है।
ओयल नगर पंचायत और ग्राम पंचायत क्षेत्र में बने दोनों मुक्तिधामों की स्थिति भी बेहतर नहीं बताई गई। कई स्थानों पर झाड़ियां इतनी बढ़ गई हैं कि आने-जाने का रास्ता तक दिखाई नहीं देता।
ओयल नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिभा गौतम ने बताया कि दोनों मुक्तिधामों की जल्द साफ-सफाई कराई जाएगी।
जिम्मेदारी ग्राम पंचायत, ब्लॉक और नगर निकाय स्तर की
मामले में मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार ने बताया कि जिले में मुक्तिधामों की देखरेख और साफ-सफाई की व्यवस्था संबंधित ग्राम पंचायत, ब्लॉक अथवा नगर पालिका स्तर से होती है। उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और जहां भी दिक्कतें हैं, उन्हें दिखवाया जाएगा। हालिया स्थानीय रिपोर्ट में भी सीडीओ का यही रुख दर्ज किया गया है।
मुक्तिधामों की मौजूदा स्थिति ऐसे समय में सवाल खड़े करती है जब ये स्थल लोगों की एक बेहद संवेदनशील और अनिवार्य जरूरत से जुड़े हैं। जर्जर ढांचे, बंद शौचालय-स्नानघर, झाड़ियों और साफ-सफाई की कमी जैसी समस्याओं का समाधान केवल अस्थायी सफाई तक सीमित रखने के बजाय नियमित रखरखाव और स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ किए जाने की जरूरत है।

