राजधानी लखनऊ स्थित केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग (क्वीन मेरी अस्पताल) में महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल परिसर में स्वच्छता के नियमों को नजरअंदाज करते हुए रूई के पैड तैयार किए जा रहे हैं। यही नहीं, जिस स्थान पर पैड बनाए जा रहे हैं, वहीं कर्मचारी जूते-चप्पल पहनकर खुलेआम आवाजाही कर रहे हैं।
जांच के दौरान देखा गया कि कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के रूई के पैड बना रहे थे। उन्होंने न तो दस्ताने पहने थे और न ही सिर के बाल ढकने के लिए हेयर नेट का इस्तेमाल किया था।
जूते-चप्पल पहनकर करते आवागमन
पड़ताल में यह भी सामने आया कि महिला कर्मचारी रूई को अपने कपड़ों पर रखकर ही पैड तैयार कर रही थीं। इस दौरान रूई के कई टुकड़े जमीन पर गिरते नजर आए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिना शू कवर के कर्मचारी जूते-चप्पल पहनकर उसी रूई के पास खड़ी थीं, जिसका इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जाना था।
ये पैड न सिर्फ सामान्य ड्रेसिंग के लिए, बल्कि कई बार महिलाओं के निजी अंगों और डिलीवरी के बाद के घावों पर भी लगाए जाते हैं। ऐसे में अस्वच्छ (गंदे) माहौल में बने पैड संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण बन सकते हैं। पड़ताल के दौरान ही एक महिला कर्मचारी मरीज के जख्म पर लगाने के लिए ऐसा ही पैड लेकर जाती दिखी।
दूषित रूई से जानलेवा संक्रमण का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रसूति विभाग में भर्ती महिलाएं और नवजात बच्चे संक्रमण के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं। अगर बिना सुरक्षा उपायों और गंदगी के बीच तैयार की गई रूई या पैड का इस्तेमाल किया जाए, तो इससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। डिलीवरी के बाद बने घावों या गर्भाशय के पास अगर अस्वच्छ रूई लगाई जाए, तो बैक्टीरिया सीधे खून में पहुंच सकते हैं।
इससे सेप्सिस (खून में संक्रमण) का खतरा होता है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं में पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पेट के निचले हिस्से में संक्रमण) जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
ऑटोक्लेव मशीन से शुद्ध करके किया जाता यूज पैड बनाने के बाद उन्हें ऑटोक्लेव मशीन से शुद्ध किया जाता है और उसके बाद ही इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी स्तर पर स्वच्छता का पालन नहीं हुआ है और बिना शुद्ध किए पैड का उपयोग किया गया है, तो यह गलत है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी और स्वच्छता मानकों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। – डॉ. अंजू अग्रवाल, विभागाध्यक्ष

