वृंदावन के प्रसिद्ध ठाकुर मदन मोहन मंदिर की दीवारें चमक गई हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की विज्ञान शाखा ने पानी के कारण दीवारों पर जमा काई और प्रदूषण से काले पड़े पत्थरों का केमिकल ट्रीटमेंट किया है, जिसके बाद मंदिर पहले जैसा नजर आने लगा है। एएसआई ने मदन मोहन मंदिर की बाहरी दीवारों पर केमिकल ट्रीटमेंट में पहले चरण में 22 लाख रुपये खर्च किए हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीक्षण रसायन पुरातत्वविद रंजना पुष्कर की निगरानी में वृंदावन के ठाकुर मदन मोहन मंदिर की दीवारों से काई हटाने का काम किया गया। उन्होंने बताया कि बीते साल शुरू किया गया पहले चरण का काम अब पूरा हो गया है। विज्ञान शाखा की टीम ने मंदिर की दीवारों पर वर्षों से प्रदूषण, धूल और कालिख जमा होने से काले पड़ गए लाल पत्थरों की दीवारों का साफ किया। वैज्ञानिक विधि से सफाई कर उन्हें मूल स्वरूप में लाया गया है।
मंदिर के शिखर से नीचे तक बाहरी दीवारों पर जमा काई और प्रदूषण की काली परत को हटाने के लिए विशेष रसायनों का इस्तेमाल किया गया। उसके बाद दीवारों के संरक्षण के लिए विशेष लेप लगाया गया। करीब 6 माह तक मंदिर की बाहरी दीवारों पर काम चला है। एएसआई मंदिर के अंदर की दीवारों को भी साफ करने की योजना बना रहा है, जिससे दीवारें फिर से बेहतर नजर आ सकें। यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है।
37 लाख रुपये से होगा दीवार का संरक्षण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मदन मोहन मंदिर की उत्तरी दीवार की ओर बाउंड्री के निर्माण की योजना बनाई है। इस पर 37 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में यह काम पूरा कर लिया जाएगा। एएसआई की निर्माण शाखा ने उत्तरी दीवार के संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की है।

