ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले में विजिलेंस ने केंद्रापड़ा ड्रेनेज डिवीजन की असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (AEE) अनुपमा साहू के खिलाफ कार्रवाई की है। विजिलेंस के अनुसार, 5 सितंबर 2026 को सूचना मिली थी कि विभाग में ठेकेदारों के लंबित बिलों को पास कराने के बदले कथित तौर पर रिश्वत की रकम जुटाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम ने अनुपमा साहू की गतिविधियों पर नजर रखी और बाद में उनके वाहन को रोककर तलाशी ली।
NH-53A पर रोका, गाड़ी से मिले ₹3.15 लाख
विजिलेंस टीम ने मार्शाघाई क्रॉसिंग के पास NH-53A पर अनुपमा साहू को उस समय रोका, जब वह कार्यालय से केंद्रापड़ा के नयनविहार स्थित अपने आवास की ओर जा रही थीं। वह विभागीय वाहन OD-29-S-6644 में सवार थीं।
तलाशी के दौरान वाहन से ₹3 लाख 15 हजार नकद बरामद किए गए। विजिलेंस के मुताबिक, इतनी बड़ी रकम अपने पास रखने के स्रोत के बारे में अधिकारी संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकीं। इसके बाद नकदी के साथ सरकारी वाहन को भी जब्त कर लिया गया।
हालांकि, इस स्तर पर बरामद रकम को सीधे रिश्वत की रकम कहना उचित नहीं होगा। इसका वास्तविक स्रोत क्या है और क्या इसका संबंध ठेकेदारों के लंबित बिलों से है, यह जांच में तय होना बाकी है।
घर की तलाशी में मिले चार लाख रुपये और
वाहन से नकदी मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाया। इसके तहत अनुपमा साहू के कार्यालय और आवासीय परिसरों की तलाशी ली गई।
केंद्रापड़ा स्थित उनके आवास से ₹4 लाख और नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह वाहन और घर से बरामद रकम को मिलाकर अब तक ₹7 लाख 15 हजार नकद बरामद किए जा चुके हैं।
आय से अधिक संपत्ति के एंगल से भी जांच
विजिलेंस अब बरामद नकदी के स्रोत की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई को आय से अधिक संपत्ति के एंगल से भी देखा जा रहा है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बरामद रकम का स्रोत क्या था और क्या यह अधिकारी की ज्ञात आय और घोषित वित्तीय स्थिति से मेल खाती है।
फिलहाल जांच जारी है और बरामद नकदी के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अनुपमा साहू से रकम के स्रोत और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ की जा रही है।
ठेकेदारों के बिल से जुड़ी शिकायत की भी जांच
विजिलेंस की शुरुआती कार्रवाई उस सूचना के बाद हुई जिसमें केंद्रापड़ा ड्रेनेज डिवीजन में ठेकेदारों के लंबित बिलों को क्लियर कराने के बदले कथित तौर पर पैसे इकट्ठा किए जाने की बात कही गई थी।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बरामद नकदी का इस कथित रिश्वत वसूली से कोई संबंध है या नहीं। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड, लंबित बिलों और संबंधित लोगों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा सकती है।
जांच पूरी होने के बाद तस्वीर होगी साफ
फिलहाल इस कार्रवाई में ₹7.15 लाख नकद बरामद होने की बात सामने आई है। विजिलेंस की तलाशी और पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद रकम का स्रोत क्या था और क्या इसका ठेकेदारों के बिलों से जुड़े कथित रिश्वत मामले में कोई प्रत्यक्ष संबंध है।
कार्रवाई की प्रमुख बातें
- अधिकारी: अनुपमा साहू
- पद: असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, केंद्रापड़ा ड्रेनेज डिवीजन
- कार्रवाई की तारीख: 5 सितंबर 2026
- वाहन से बरामद: ₹3.15 लाख
- आवास से बरामद: ₹4 लाख
- कुल नकदी: ₹7.15 लाख
- स्थान: केंद्रापड़ा, ओडिशा
- जांच का आधार: ठेकेदारों के लंबित बिलों से कथित रिश्वत वसूली की सूचना
- जांच का एक पहलू: आय से अधिक संपत्ति का एंगल
