राम मंदिर के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस के सवाल, इमरान मसूद बोले- ‘फौजी को साधु का काम दे दिया’

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राम मंदिर के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस के सवाल, इमरान मसूद बोले- ‘फौजी को साधु का काम दे दिया’

अयोध्या के राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। बुधवार को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

जितेंद्र मिश्रा का चयन एक विस्तृत प्रक्रिया के बाद हुआ। CEO पद के लिए ट्रस्ट को कुल 5,585 आवेदन मिले थे। स्क्रीनिंग और इंटरव्यू के कई चरणों के बाद 16 उम्मीदवारों के साथ विस्तृत बातचीत हुई और चयन समिति ने अंतिम रूप से तीन नामों का पैनल ट्रस्ट के सामने रखा। इसके बाद ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति जताई।

‘देश की सेवा की, अब रामलला की सेवा करूंगा’

नियुक्ति के बाद जितेंद्र मिश्रा ने इसे भगवान श्रीराम का आशीर्वाद बताया। अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने कहा कि उनके जीवन में दो बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी आई—पहली बार देश की सेवा करने की और अब राम मंदिर तथा उसके श्रद्धालुओं की सेवा करने की। उन्होंने कहा कि पहले वह पूरी व्यवस्था को समझेंगे और इसके बाद अपनी कार्ययोजना साझा करेंगे।

CEO के तौर पर मिश्रा मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को संभालेंगे। उनकी भूमिका में संचालन व्यवस्था विकसित करना, मौजूदा गतिविधियों का प्रबंधन और वैधानिक एवं नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल होगा।

कांग्रेस ने नियुक्ति पर उठाए सवाल

जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मंदिर से जुड़े काम साधु-संतों को करने दिए जाने चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक ऐसे व्यक्ति को, जो वर्षों तक वायुसेना में रहे और विमान उड़ाते रहे, मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी दी गई है।

मसूद ने आरोप लगाया कि RSS और BJP ने एक फौजी को ऐसे काम में लगा दिया है जो उनके मुताबिक साधु-संतों का है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर का काम मंदिर से जुड़े लोगों को ही करने देना चाहिए। ये इमरान मसूद के राजनीतिक आरोप और टिप्पणी हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

राशिद अल्वी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र कर सवाल उठाया

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एक रिटायर्ड एयर चीफ का राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद से क्या संबंध है। अल्वी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा कोई ऐसा ‘छिपा हुआ सच’ है, जिसकी वजह से जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी दी गई।

अल्वी ने मंदिर में हुई कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर और नियुक्ति के बीच किसी छिपे संबंध का उनका संकेत एक राजनीतिक आरोप/सवाल है और इसकी कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

अजय राय ने भी मांगी जवाबदेही

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी CEO की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नया CEO नियुक्त कर देने से चढ़ावे से जुड़े विवाद का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कथित चढ़ावा चोरी के मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक पुनर्गठन किया जा रहा है। ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति के साथ नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया है और वित्तीय एवं दान प्रबंधन में तकनीक के इस्तेमाल पर भी काम आगे बढ़ाया है।

कौन हैं जितेंद्र मिश्रा?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से हैं और भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक सेवा दे चुके हैं। वह जनवरी 2025 में वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख बने थे और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी कमांड की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले वह फाइटर स्क्वाड्रन की कमान, एयरक्राफ्ट एवं सिस्टम टेस्टिंग से जुड़े महत्वपूर्ण पदों और एयर मुख्यालय में वरिष्ठ जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

मिश्रा 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल सहित सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।

अब सैन्य सेवा से सेवानिवृत्ति के कुछ ही महीनों बाद जितेंद्र मिश्रा के सामने राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी है। ट्रस्ट की ओर से CEO पद के लिए की गई चयन प्रक्रिया और नई प्रशासनिक संरचना का उद्देश्य मंदिर के बढ़ते संचालन, श्रद्धालु सुविधाओं और वित्तीय-प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना है।

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