आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पांच भवन जर्जर, छत-दीवारों में मिलीं खामियां; शासन को भेजी गई ऑडिट रिपोर्ट

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पांच भवन जर्जर, छत-दीवारों में मिलीं खामियां; शासन को भेजी गई ऑडिट रिपोर्ट

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के पुराने भवनों की हालत को लेकर हुए ऑडिट में गंभीर खामियां सामने आई हैं। पांच भवनों के निरीक्षण के दौरान छत, प्लास्टर और दीवारों में जर्जरता के साथ कई जगह सीलन, उखड़ा हुआ प्लास्टर और सरिया में जंग मिली है। ऑडिट रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब बजट स्वीकृत होने के बाद इन भवनों की मरम्मत और रंगाई-पुताई का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

यह कार्रवाई एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में 21 अगस्त को 10 वर्षीय बच्चे उमेर के ऊपर छत का प्लास्टर गिरने की घटना के बाद तेज हुई। प्लास्टर गिरने से बच्चे को चोट लगी थी और अगले दिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। बच्चे के परिजनों और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने प्लास्टर गिरने की घटना को उसकी मौत से जोड़ा था। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने उसकी गंभीर निमोनिया और जन्मजात बीमारी को मौत की वजह बताया था। उपलब्ध रिपोर्टों में भी इस मामले में मौत के कारण को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

पांच सदस्यीय टीम ने किया भवनों का निरीक्षण

घटना के बाद पुराने भवनों की स्थिति की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम में एसएन मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. मनीष बंसल, डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह और लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियर शामिल थे।

टीम ने करीब एक सप्ताह तक भवनों का निरीक्षण किया। जांच में केवल प्लास्टर और छत की स्थिति ही नहीं देखी गई, बल्कि सीलन और सीवेज सिस्टम से जुड़ी कमियों का भी जायजा लिया गया। निरीक्षण में सबसे अधिक जर्जर स्थिति बाल रोग विभाग की इमारत की सामने आई।

छत और दीवारों में दिखीं जर्जरता की निशानियां

ऑडिट के दौरान कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ा हुआ मिला। कुछ हिस्सों में सरिया में जंग लगी मिली, जबकि सीलन की समस्या भी सामने आई। ऐसी स्थिति पुराने भवनों की संरचनात्मक देखरेख और समय-समय पर होने वाली मरम्मत की जरूरत को रेखांकित करती है।

एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और मेडिसिन विभाग की पुरानी इमारत में भी पहले निरीक्षण के दौरान कई जगह प्लास्टर उखड़ने, सीलन और छत की खराब स्थिति की जानकारी सामने आई थी। कॉलेज के प्राचार्य ने पुराने भवनों का चरणबद्ध ऑडिट कराए जाने की बात कही थी।

शासन से बजट मिलने के बाद शुरू होगा काम

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अनुसार, ऑडिट रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब बजट स्वीकृत होने के बाद इन भवनों की मरम्मत कराए जाने की संभावना है। मरम्मत का काम विशेषज्ञों की निगरानी में कराया जाएगा। इसके साथ ही पुराने भवनों की रंगाई-पुताई भी प्रस्तावित है।

एसएन मेडिकल कॉलेज में कुछ अन्य भवनों की मरम्मत का काम पहले से चल रहा है। एकेडमिक ब्लॉक की बाहरी दीवार पर मरम्मत कार्य शुरू होने की जानकारी भी सामने आई थी, जहां प्लास्टर गिरने और सरिया दिखाई देने की समस्या बताई गई थी।

बाल रोग विभाग की इमारत सबसे ज्यादा जर्जर

ऑडिट में बाल रोग विभाग की इमारत को सबसे अधिक जर्जर बताया गया है। इसे भविष्य में क्रिटिकल केयर बिल्डिंग में स्थानांतरित करने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में कई महीने लग सकते हैं।

फिलहाल ऑडिट रिपोर्ट शासन के पास भेजी जा चुकी है। अब निगाह बजट स्वीकृति और उसके बाद होने वाले मरम्मत कार्य पर है। इस पूरी प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि हाल में एसएन मेडिकल कॉलेज के मरीजों वाले हिस्से में प्लास्टर गिरने की घटना सामने आ चुकी है।

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