पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप; AAP ने किया पलटवार

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पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप; AAP ने किया पलटवार

चंडीगढ़: पंजाब में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची से बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग की 13 अगस्त 2026 को जारी ड्राफ्ट सूची में चड्ढा का नाम ASDD यानी ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लीकेट’ श्रेणी में दर्ज है और उनके नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ यानी ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ लिखा गया है।

चड्ढा ने इस कार्रवाई को महज प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई कर रही है। हालांकि, ये आरोप फिलहाल चड्ढा का दावा हैं और स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं हुआ है कि उनके नाम को हटाने के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप हुआ।

चड्ढा का दावा- मोहाली में दर्ज है वोटर आईडी

राघव चड्ढा के मुताबिक उनका वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है और उन्होंने 1 जून 2024 को लोकसभा चुनाव के दौरान मोहाली के लखनौर में मतदान भी किया था। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड और उस समय की रिपोर्टों में भी उनके मोहाली में मतदान करने की पुष्टि होती है।

चड्ढा ने कहा कि मौजूदा सूची अभी ड्राफ्ट है, इसलिए उनके पास दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा शामिल कराने का रास्ता मौजूद है। SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया 12 सितंबर 2026 तक चलनी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर में प्रकाशित की जानी है।

‘किसने मुझे स्थायी रूप से शिफ्टेड मार्क किया?’

चड्ढा ने अपने आरोपों को आगे बढ़ाते हुए चुनावी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्हें ‘Permanently Shifted’ किस अधिकारी ने चिह्नित किया, किस स्तर पर इसका सत्यापन हुआ और इसे आगे किसने प्रोसेस किया।

उनका तर्क है कि बूथ लेवल ऑफिसर से लेकर चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर काम करने वाले अधिकारी राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे से आते हैं। चड्ढा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर से जुड़े मामलों में राज्य सरकार के प्रभाव के कारण उन पर राजनीतिक दबाव की संभावना हो सकती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आरोपों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि उनके नाम को हटाने में पंजाब सरकार ने हस्तक्षेप किया था।

AAP का पलटवार- SIR चुनाव आयोग की प्रक्रिया

राघव चड्ढा के आरोपों पर AAP ने पलटवार करते हुए कहा कि मतदाता सूची का SIR चुनाव आयोग की देखरेख में होता है और पंजाब सरकार की यह तय करने में भूमिका नहीं है कि किस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया जाए।

AAP का दावा है कि चड्ढा अब पंजाब में नहीं रहते और अगर उन्होंने अपना मतदाता पंजीकरण बनाए रखना या किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना था, तो यह उनकी जिम्मेदारी थी। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा अपने वोटर रिकॉर्ड से जुड़े विवाद के लिए AAP और पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

यहां एक अहम तथ्य यह भी है कि SIR के दौरान मतदाता सूची तैयार करने की संवैधानिक जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। इसलिए केवल किसी राज्य सरकार के अधिकारियों के चुनावी प्रक्रिया में तैनात होने के आधार पर राजनीतिक हस्तक्षेप साबित नहीं होता।

AAP छोड़कर BJP में जाने के बाद बढ़ा टकराव

राघव चड्ढा 2022 में AAP के उम्मीदवार के तौर पर पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे। अप्रैल 2026 में वह छह अन्य AAP राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। इसके बाद से चड्ढा और AAP के बीच राजनीतिक टकराव लगातार सामने आया है।

चड्ढा का आरोप है कि AAP छोड़ने के बाद से उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है और मतदाता सूची में ‘Permanently Shifted’ दर्ज किया जाना उसी कथित राजनीतिक प्रतिशोध की एक और कड़ी है। इन आरोपों को AAP ने खारिज किया है।

‘Protected List’ का भी चड्ढा ने उठाया मुद्दा

चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का हवाला देते हुए ‘Protected List’ का मुद्दा भी उठाया है। उनका दावा है कि इस प्रावधान के तहत सांसदों, विधायकों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों और कुछ अन्य सार्वजनिक पदों से जुड़े व्यक्तियों के नामों को विशेष प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट रोल में शामिल रखा जाना चाहिए, ताकि दावे और आपत्तियों के दौरान आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकें।

चड्ढा का कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और इसलिए उनके मामले में इस प्रावधान का पालन होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में इस व्यवस्था की अनदेखी की गई।

नाम हटने से राज्यसभा सदस्यता पर असर नहीं

वोटर लिस्ट का यह विवाद राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम हटना अपने आप राघव चड्ढा की राज्यसभा सदस्यता खत्म नहीं करता। भारतीय कानून के तहत राज्यसभा सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार का किसी एक राज्य का मतदाता होना जरूरी नहीं है; वह देश की किसी भी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत हो सकता है।

इसलिए फिलहाल मुख्य सवाल यह है कि SIR की दावे-आपत्ति प्रक्रिया के बाद चड्ढा का नाम पंजाब की अंतिम मतदाता सूची में दोबारा शामिल होता है या नहीं। साथ ही, उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने आता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।

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