एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली किडनी ट्रांसप्लांट सफलता के बाद बढ़ी उम्मीद, 15 मरीज पंजीकृत

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एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली किडनी ट्रांसप्लांट सफलता के बाद बढ़ी उम्मीद, 15 मरीज पंजीकृत

आगरा: एसएन मेडिकल कॉलेज में पहला किडनी ट्रांसप्लांट सफल होने के बाद अब किडनी रोगियों के लिए इलाज की नई उम्मीद जगी है। 22 अगस्त को सिकंदराराऊ निवासी महेंद्र कुशवाहा का सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। उनकी पत्नी मीना ने उन्हें अपनी किडनी दान की थी। इलाज के बाद दोनों की हालत सामान्य बताई गई और महेंद्र को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।

इस सफलता के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। किडनी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन के अनुसार, अब तक 15 मरीजों का पंजीकरण हो चुका है। इन मरीजों का चरणबद्ध तरीके से ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

पहली सफलता से बढ़ा मरीजों का भरोसा

एसएन मेडिकल कॉलेज में 22 अगस्त को हुआ पहला किडनी ट्रांसप्लांट एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम की देखरेख में किया गया था। महेंद्र कुशवाहा को उनकी पत्नी मीना ने किडनी दान की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन की प्रक्रिया करीब आठ घंटे चली थी।

ट्रांसप्लांट के बाद दोनों को अलग-अलग चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया था। बाद में उनकी हालत सामान्य रही और जांच रिपोर्ट भी संतोषजनक आने के बाद महेंद्र को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

महेंद्र और उनकी पत्नी की इस कहानी ने अन्य किडनी रोगियों और उनके परिवारों में भी भरोसा बढ़ाया है। ट्रांसप्लांट के बाद पत्नी मीना ने वीडियो कॉल के जरिए अपने पति से बात की थी और डॉक्टरों के प्रति आभार जताया था।

अगले मरीजों के लिए तैयार हो रही प्रक्रिया

एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के मुताबिक, पहला ट्रांसप्लांट सफल होने के बाद अब अगले मरीजों की तैयारी की जा रही है। इसी महीने एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम फिर आगरा आएगी और उसकी देखरेख में अगले किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की उम्मीद है।

इससे पहले की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि कई मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। सितंबर में एसजीपीजीआई की टीम के आगरा आने की जानकारी दी गई थी।

15 मरीजों का पंजीकरण, चरणबद्ध होंगे ट्रांसप्लांट

किडनी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि अब तक 15 मरीज किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकृत हो चुके हैं। इनका ट्रांसप्लांट एक साथ नहीं, बल्कि मरीजों की चिकित्सकीय जांच, आवश्यक मंजूरियों और डोनर की उपयुक्तता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

एसएन मेडिकल कॉलेज में ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू होने से आगरा के अलावा आसपास के जिलों के मरीजों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे गंभीर किडनी रोगियों को ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

शुरुआत में SGPGI की विशेषज्ञ टीम करेगी निगरानी

एसएन मेडिकल कॉलेज में शुरुआती किडनी ट्रांसप्लांट एसजीपीजीआई लखनऊ की विशेषज्ञ टीम की निगरानी में किए जा रहे हैं। कॉलेज प्रशासन ने पहले ही कहा था कि शुरुआती कुछ ऑपरेशन विशेषज्ञ टीम की देखरेख में होंगे और आगे चलकर स्थानीय चिकित्सकीय टीम को भी इस प्रक्रिया में अधिक जिम्मेदारी दी जाएगी।

पहले सफल ट्रांसप्लांट के बाद अब एसएन मेडिकल कॉलेज के सामने इस सुविधा को नियमित और सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने की चुनौती है। अगले मरीजों के ट्रांसप्लांट की सफलता से इस सुविधा पर मरीजों और उनके परिवारों का भरोसा और मजबूत होने की उम्मीद है।

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