सीधी: सीधी जिला जेल में एक कैदी की संदिग्ध मौत हड़कंप मच गया है। पॉक्सो एक्ट के मामले में 2023 से बंद रजनीश दुबे की शुक्रवार को मौत हो गई, लेकिन मौत के समय और परिस्थितियों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस विवाद ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जेल प्रशासन का क्या कहना है?
जेल प्रशासन का कहना है कि कैदी की तबीयत पहले से खराब थी और उसका इलाज जेल के डॉक्टर द्वारा किया जा रहा था। जेल अधीक्षक रविशंकर सिंह के अनुसार, शुक्रवार दोपहर में उसकी तबीयत बिगड़ी थी, जिसके बाद इलाज जारी रहा। रात करीब 9 बजे हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल सीधी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
8 घंटे पहले ही हो चुकी थी मौत?
लेकिन इस कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस.बी. खरे ने खुलासा किया कि कैदी की मौत अस्पताल पहुंचने से करीब 8 घंटे पहले ही हो चुकी थी। इस बयान ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया है और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर कैदी की मौत कई घंटे पहले ही हो गई थी, तो उसे समय पर अस्पताल क्यों नहीं लाया गया? क्या उसे सही समय पर इलाज नहीं मिला, या फिर मौत के बाद घटनाक्रम को छिपाने की कोशिश की गई? ये ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब अभी तक सामने नहीं आए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जो इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने ला सकती है।

