आगरा के बिजलीघर बस स्टैंड के पुनर्विकास कार्य में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पीपीपी मॉडल के तहत दिए गए इस प्रोजेक्ट में सेवा प्रदाता कंपनी ने नियमों की अनदेखी करके बिना औपचारिक हस्तांतरण और निर्धारित भुगतान किए ही तोड़फोड़ का कार्य शुरू करा दिया। मामला सामने आने के बाद मुख्यालय स्तर से कंपनी को नोटिस जारी कर कार्य तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया है।
बिजलीघर बस स्टैंड के विकास के लिए वर्ष 2024 में करीब 25 करोड़ रुपये में 90 वर्ष की लीज पर टेंडर जारी हुआ था, जिसे एएमजी इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ने हासिल किया था। शर्तों के अनुसार कंपनी को कार्य शुरू करने से पहले छह करोड़ रुपये तीन किस्तों में जमा करने थे। इसमें पहली किस्त 30 फीसदी और दूसरी और तीसरी किस्तें 35 फीसदी की थीं, लेकिन, आरोप है कि सेवा प्रदाता कंपनी ने पहली किस्त 30 फीसदी जमा कर बस स्टैंड को बिना हस्तांतरित परिसर में बने भवनों को तोड़ना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही तोड़फोड़ के बाद लाखों रुपये का स्क्रैप भी निकाल लिया गया। यह कार्य कई महीनों तक चलता रहा, लेकिन जनपद स्तर के अधिकारियों ने इसकी सूचना मुख्यालय को नहीं दी। इससे स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला उजागर होने के बाद परिवहन निगम मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
जीएम पीपीपी यजुवेंद्र कुमार ने बताया कि सेवा प्रदाता कंपनी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए कार्य शुरू किया था। जानकारी मिलते ही काम रुकवाया गया है और कंपनी को नियमानुसार भुगतान करने के बाद ही आगे कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।

