इस महीने की 26 तारीख को 690 ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। इसके बाद वह कोई विकास कार्य नहीं करा सकेंगे। एडीओ पंचायत प्रशासक बनकर गांव की सरकार चलाएंगे। ऐसे में प्रधान राजस्थान और मध्य प्रदेश की तर्ज पर खुद को प्रशासक बनाए जाने की मांग कर रहे हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टलने के आसार हैं, जिस वजह से प्रधान असमंजस में फंस गए हैं। प्रधानों का कहना है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद विकास कार्य प्रभावित होंगे, लेकिन पंचायत राज विभाग का कहना है कि एडीओ पंचायत के माध्यम से सभी कार्य जारी रहेंगे। जिले की 690 ग्राम पंचायतों को 267 क्लस्टर में बांटा गया है, जिनमें 15 एडीओ पंचायत और 157 ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारियों की नियुक्ति है।
चुनाव न होने की स्थिति में तीन से चार माह की अवधि के लिए प्रशासक नियुक्त होने की व्यवस्था है। इसके बाद 690 ग्राम पंचायत को चलाने का जिम्मा 157 सचिवों पर होगा। एक से अधिक पंचायत का भार होने पर सचिवों के लिए विकास कार्यों को बिना ग्राम पंचायत समिति के करना आसान नहीं होगा।
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष अनीस चाहर ने बताया कि डीएम के माध्यम से सीएम को ज्ञापन सौंपा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश मॉडल की तर्ज पर यूपी में प्रधानों को प्रशासक बनाया जाए। सलेमाबाद के प्रधान अभिषेक चाहर ने बताया कि चुनाव को लेकर अनिश्चितता का माहौल है। विप्रावली प्रधान देवानंद परिहार ने कहा कि चुनाव टलने पर सरकारी कर्मियों को प्रशासक नहीं बनाया जाए। डीपीआरओ मनीष कुमार का कहना है कि प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल को बढ़ाने संबंधी कोई आदेश नहीं मिला है।

