उत्तर प्रदेश में राज्य कर विभाग ने कर प्रशासन के मोर्चे पर दोहरी उपलब्धि हासिल की है। जीएसटी बकाया हासिल करने में 141% उछाल के साथ सक्रिय करदाताओं में देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 3458.22 करोड़ की वसूली हुई, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 1430.04 करोड़ के मुकाबले 2028.18 करोड़ अधिक है।
वहीं सक्रिय जीएसटी देने वालों की संख्या 21.52 लाख पहुंच गई है, जिससे यूपी देश में पहले स्थान पर आ गया है। महाराष्ट्र 20.05 लाख करदाताओं के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।
बड़े बकाया मामलों पर प्रभावी कार्रवाई राज्य कर विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राजस्व प्राप्ति के प्रयासों में उत्तर प्रदेश ने बड़ा उछाल दर्ज किया है। इसमें सबसे अहम योगदान जीएसटी का रहा, जहां वसूली 810.96 करोड़ से बढ़कर 2657.80 करोड़ पहुंच गई। यह 1846.84 करोड़ की बढ़ोतरी और 227.7 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है। वहीं वैट में भी स्थिर बढ़त देखने को मिली, जहां वसूली 619.08 करोड़ से बढ़कर 800.42 करोड़ हो गई, जो 29.3 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे साफ है कि विभाग ने बड़े बकाया मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की है।
विभागीय प्रयासों के तहत पंजीकरण जागरुकता अभियान चलाया गया, जिससे नए व्यापारियों को सिस्टम में जोड़ा गया। वर्ष 2024-25 में नए पंजीकरण से ही 500 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। साथ ही व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे अनुपालन में सुधार आया।
प्रभावी वसूली कर राजस्व में तेजी आई आयुक्त, राज्य कर डॉ. नितिन बंसल ने बताया कि राज्य कर विभाग ने एक तरफ व्यापारियों के पंजीयन पर फोकस किया तो दूसरी तरफ बकाया वसूली के लिए अलग योजना बनाकर काम किया। इसी का परिणाम है कि एक तरफ पुराने बकाया की प्रभावी वसूली कर राजस्व में तेजी आई है, तो दूसरी तरफ नए करदाताओं को जोड़कर अपने टैक्स बेस को भी मजबूत किया है। प्रदेश अब कर संग्रह और करदाता संख्या दोनों ही मामलों में अग्रणी बनकर उभरा है।

