लखनऊ: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर मंच के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासत और तेज हो गई है। अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने इस मामले को गंभीर और निंदनीय बताते हुए जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में जातिवादी भेदभाव के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मामले को लेकर उत्तराखंड सरकार से बिना देरी कार्रवाई करने की मांग की।
‘मामला बेहद चिंतनीय और निंदनीय’
मायावती ने कहा कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद उनके भाषण वाले मंच का कथित तौर पर इसलिए शुद्धिकरण किया गया क्योंकि वह दलित हैं।
उन्होंने कहा कि यह जानकारी संसद के जरिए भी देश के सामने आई है और मामला “अति-निंदनीय व चिंतनीय” है।
बसपा प्रमुख ने उत्तराखंड सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जातिवादी या सामंती मानसिकता के तहत ऐसा किया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
मायावती ने की जेल भेजने की मांग
मायावती ने कहा कि सरकार को ऐसे कथित जातिवादी और सामंती तत्वों के खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
उनके मुताबिक, जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मायावती ने इस घटना को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में न देखकर सामाजिक भेदभाव के मुद्दे से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है।
1. उत्तराखण्ड स्टेट के हल्द्वानी में अभी हाल ही में, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे के हुये प्रोग्राम के बाद उनके मंच का दलित होने की वजह से शुद्धीकरण किया गया है। यह जानकारी कल संसद के ज़रिये भी देश को मिली है। यह मामला अति-निन्दनीय व चिन्तनीय है…
— Mayawati (@Mayawati) August 14, 2026
खरगे ने संसद में उठाया था मुद्दा
यह विवाद उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया जब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में हल्द्वानी की घटना का जिक्र किया।
खरगे ने कहा कि उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने भाषण में किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके कार्यक्रम के बाद मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
खरगे ने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में क्या इस तरह की घटनाएं होनी चाहिए और संविधान की रक्षा कैसे होगी।
उन्होंने इस मामले में छुआछूत से जुड़े कानूनों के तहत केस दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग भी की।
BJP की ओर से क्या कहा गया?
राज्यसभा में खरगे के आरोपों का जवाब केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने दिया था। नड्डा ने कहा था कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती और घटना की जांच कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि अगर वहां ऐसा कुछ हुआ है तो उसकी निश्चित रूप से जांच होगी और उन्होंने घटना की निंदा की।
इससे पहले भी नड्डा ने स्पष्ट किया था कि ऐसी गतिविधियों का भाजपा समर्थन नहीं करती।
मायावती ने RSS प्रमुख पर भी साधा निशाना
मायावती ने अपने बयान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख से भी इस घटना पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
उन्होंने आरक्षण और दलितों से जुड़े मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक समानता और भेदभाव के मामलों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद संसद से निकलकर उत्तराखंड की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।
नांदेड़ में सुखबीर बादल पर हमले का भी जिक्र
मायावती ने अपने बयान में महाराष्ट्र के नांदेड़ में शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले का भी जिक्र किया।
उन्होंने इस घटना को दुखद और चिंताजनक बताते हुए केंद्र तथा महाराष्ट्र सरकार से मामले को गंभीरता से लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।
अब जांच पर टिकी नजर
हल्द्वानी के मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर कांग्रेस पहले ही कार्रवाई की मांग कर चुकी है। खरगे के संसद में मुद्दा उठाने और अब मायावती के जांच व गिरफ्तारी की मांग करने के बाद विवाद और गहरा गया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्तराखंड सरकार इस पूरे मामले की औपचारिक जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी? जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें वास्तव में कौन लोग जिम्मेदार थे।
