Chhattisgarh Cyber Fraud: साइबर ठगी केस में पुलिस पर 1 करोड़ की वसूली का आरोप, वायरल ऑडियो से मचा हड़कंप; ASI और आरक्षक सस्पेंड

indianloveindia
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साइबर ठगी मामले में पुलिस अधिकारियों ने वसूले एक करोड़ रुपये, ऑडियो सामने आने पर बवाल

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में साइबर ठगी के एक मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर करीब एक करोड़ रुपये की कथित वसूली का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाले लोग खुद इसी साइबर ठगी मामले में आरोपी हैं। उनका दावा है कि केस में धाराएं कम करने और जल्द चालान पेश करने के बदले उनसे मोटी रकम मांगी गई।

इस पूरे मामले में एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद जांच शुरू हो गई है। शुरुआती कार्रवाई के तौर पर एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मामले से जुड़े अन्य अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए एक करोड़ रुपये के लेनदेन के आरोप के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वायरल ऑडियो और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

क्या है पूरा मामला?

मामला अंबिकापुर में सामने आई कथित साइबर ठगी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी के मुताबिक, उन्होंने मनी ट्रेड 365 और स्काई ट्रेड ऐप के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में 84 किश्तों में करीब 20.15 लाख रुपये निवेश किए थे।

बाद में ऐप बंद हो गया और उन्हें ठगी का पता चला। इसके बाद रेंज साइबर थाना अंबिकापुर में BNS की धारा 318(4), 3(5) और IT Act की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने देश के अलग-अलग राज्यों से 23 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

आरोपियों ने पुलिस पर ही लगा दिया गंभीर आरोप

मामले में गिरफ्तार आरोपियों की ओर से अब पुलिस अधिकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

आरोप है कि केस में कुछ धाराएं कम करने और जल्द चालान पेश करने के बदले पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की। आरोप लगाने वालों का दावा है कि रकम का लेनदेन हवाला के जरिए किया गया।

इसी दावे को लेकर एक कथित ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें पैसे की बातचीत होने का आरोप लगाया जा रहा है।

कथित ऑडियो में 50-50 लाख रुपये की बात?

सामने आए कथित ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक करोड़ रुपये को दो किस्तों में 50-50 लाख रुपये के तौर पर लेने की बातचीत हुई।

इसके अलावा आरक्षक अंशुल शर्मा पर अलग से भी रुपये मांगने का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें मौजूद आवाजों की पहचान की अभी जांच होनी बाकी है। इसलिए आरोपों को फिलहाल जांच का विषय माना जा रहा है।

एएसआई और आरक्षक क्यों हुए सस्पेंड?

कथित ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। आरोपों से जुड़ी बातचीत के आधार पर एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को तत्काल निलंबित कर दिया गया।

आईजी दीपक कुमार झा के मुताबिक, एक करोड़ रुपये के कथित लेनदेन के आरोप के समर्थन में अभी तक कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। हालांकि, पैसे मांगने से संबंधित बातचीत का कथित ऑडियो सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।

कोर्ट ने भी जारी किया नोटिस

मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है। आरोपी पक्ष की ओर से पुलिस पर लगाए गए आरोपों के बाद सीबीआई कोर्ट ने सीबीआई, ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यानी अब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष भी सामने आएगा और अदालत के समक्ष मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल- क्या सच में हुई एक करोड़ की डील?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या साइबर ठगी मामले में आरोपियों से केस कमजोर करने के बदले वास्तव में एक करोड़ रुपये की मांग और लेनदेन हुआ था, या फिर वायरल ऑडियो और आरोपों के पीछे कोई दूसरी कहानी है?

फिलहाल एक करोड़ रुपये के कथित लेनदेन का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। पुलिस विभाग ने जांच शुरू कर दी है और ऑडियो समेत सभी आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है।

जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि वायरल ऑडियो में हुई कथित बातचीत के पीछे वास्तविकता क्या है और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए एक करोड़ रुपये की वसूली के आरोप कितने सही हैं।

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