बदायूं के बिल्सी क्षेत्र निवासी 72 वर्षीय एक मरीज की बरेली के निजी मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज में हुई जांच में मरीज के स्वाइन फ्लू से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, बदायूं स्वास्थ्य विभाग ने मौत को स्वाइन फ्लू से हुई मौत के तौर पर पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार, मरीज पहले से ही दूसरी बीमारी से भी पीड़ित था और उसका उपचार चल रहा था।
सीएमओ डॉ. विकास शर्मा के मुताबिक, जिले में अब तक आठ लोगों में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें चार मामले फिलहाल सक्रिय हैं, जबकि उपचार के बाद तीन लोग स्वस्थ हो चुके हैं। संक्रमित मरीजों में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बदायूं के रहने वाले हैं, लेकिन फिलहाल दूसरे शहरों में रह रहे हैं।
दिल्ली, अलीगढ़ और ग्रेटर नोएडा में मिले संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले से जुड़े स्वाइन फ्लू संक्रमित लोगों में दो दिल्ली, दो अलीगढ़ और एक व्यक्ति ग्रेटर नोएडा में मिला है। इन मरीजों का उपचार संबंधित शहरों में ही कराया जा रहा है।
संक्रमित लोगों की जानकारी जुटाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके बदायूं स्थित बताए गए पतों पर भी पहुंची। हालांकि, टीम को वहां कोई मरीज निवास करता नहीं मिला। इससे स्पष्ट है कि जिले के संक्रमित मामलों में कुछ लोग फिलहाल दूसरे शहरों में रह रहे हैं।
इससे पहले स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली में बढ़ते स्वाइन फ्लू के मामलों को देखते हुए बदायूं में भी निगरानी और तैयारियां बढ़ाने की बात कही थी। विभाग ने लोगों से सावधानी बरतने और बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी।
कोरोना काल की पीपीई किट अब इस्तेमाल लायक नहीं
स्वाइन फ्लू के मामलों के बीच बदायूं स्वास्थ्य विभाग के सामने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौती भी सामने आई है। विभाग के पास कोविड-19 के दौरान खरीदी गई 252 पीपीई किट मौजूद हैं, लेकिन इन किटों को रखे हुए सात साल से अधिक समय हो चुका है और उनकी वैधता समाप्त हो चुकी है।
ऐसे में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध या संक्रमित मरीजों के उपचार के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पुरानी पीपीई किट पर निर्भर रहना उचित नहीं माना जा रहा है। विभाग ने पीपीई किट, मास्क और अन्य आवश्यक सुरक्षा सामग्री की मांग भेजी है।
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बेड आरक्षित
स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए उपचार व्यवस्था भी तैयार की है। जिला अस्पताल में इसके लिए एक वार्ड आरक्षित किया गया है। इसके अलावा राजकीय मेडिकल कॉलेज में 20 बेड स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
विभाग का उद्देश्य संदिग्ध मरीज मिलने पर उसे अन्य मरीजों से अलग रखकर आवश्यक जांच और उपचार उपलब्ध कराना है।
मौत को लेकर विभाग ने नहीं की स्वाइन फ्लू की पुष्टि
बरेली में उपचार के दौरान मृत 72 वर्षीय मरीज की जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन बदायूं स्वास्थ्य विभाग ने अभी उसकी मौत का कारण स्वाइन फ्लू को नहीं माना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, मरीज पहले से दूसरी बीमारी से भी पीड़ित था।
ऐसे में फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस घटना को स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीज की मौत के रूप में रिपोर्ट किया जा सकता है, लेकिन स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टि के तौर पर नहीं।
