महाराष्ट्र की सत्ता में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना भले ही महायुति गठबंधन के तहत साथ हों, लेकिन सहकारिता क्षेत्र में दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया मोर्चा खुलता दिख रहा है। अब नजर मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (Mumbai District Central Cooperative Bank) के आगामी चुनाव पर है, जहां शिंदे की शिवसेना के मैदान में उतरने की चर्चा ने बीजेपी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
मुंबई के सहकारी क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले इस बैंक पर फिलहाल बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर का प्रभाव है। ऐसे में अगर शिंदे सेना अलग पैनल के साथ चुनाव मैदान में उतरती है, तो यह मुकाबला महायुति के दोनों घटकों के बीच सीधे शक्ति परीक्षण में बदल सकता है।
मुंबई बैंक पर क्यों है राजनीतिक नजर?
मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक को आम तौर पर मुंबै बैंक के नाम से भी जाना जाता है। बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक इसकी कार्यशील पूंजी ₹10,282.07 करोड़ थी। इसी अवधि में बैंक की जमा राशि ₹8,738.08 करोड़ और कर्ज एवं अग्रिम ₹6,437.35 करोड़ दर्ज किए गए। बैंक की कुल सदस्यता 20,484 थी, जिसमें 18,691 सहकारी संस्थाएं और 1,793 व्यक्तिगत सदस्य शामिल थे।
बैंक की गतिविधियां सिर्फ पारंपरिक बैंकिंग तक सीमित नहीं हैं। इसके आधिकारिक ऋण उत्पादों में आवास ऋण, सहकारी संस्थाओं के लिए वित्तीय सहायता, वेतनभोगी कर्मचारियों की सहकारी संस्थाओं के लिए कर्ज और हाउसिंग सोसायटियों से जुड़े ऋण शामिल हैं।
यही वजह है कि सहकारी बैंक का नियंत्रण महाराष्ट्र की राजनीति में केवल आर्थिक प्रभाव का सवाल नहीं माना जाता। बैंक के माध्यम से बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं, हाउसिंग सोसायटियों और सदस्यों से संपर्क बना रहता है।
प्रवीण दरेकर के नेतृत्व को चुनौती?
मौजूदा राजनीतिक समीकरण में बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के प्रमुख चेहरों में हैं। अगस्त 2026 में दरेकर ने मुंबई की हाउसिंग सोसायटियों के सेल्फ-रीडेवलपमेंट को लेकर बड़े अभियान की घोषणा भी की थी। उनके मुताबिक, बैंक के माध्यम से 46 सोसायटियों के लिए कर्ज मंजूर किया जा चुका है और करीब 21-22 इमारतों का काम पूरा हो चुका है।
ऐसे में शिंदे सेना का संभावित चुनावी प्रवेश दरेकर के प्रभाव वाले सहकारी नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती माना जा सकता है।
ठाणे बैंक की जीत से बढ़ा शिंदे गुट का आत्मविश्वास
शिंदे सेना और बीजेपी के लिए सहकारिता चुनाव का महत्व हाल में हुए ठाणे जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव से भी समझा जा सकता है। जून 2026 में महायुति के सहकार पैनल ने 21 सदस्यीय बोर्ड में 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। बाद में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन ने बैंक पर नियंत्रण हासिल किया।
हालांकि, ठाणे में दोनों दल एक साथ चुनावी रणनीति का हिस्सा थे। मुंबई बैंक में यदि शिंदे सेना अलग राजनीतिक पैनल के साथ उतरती है, तो तस्वीर अलग होगी।
BMC चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव ऐसे समय में अहम हो सकता है जब महाराष्ट्र में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी नजरें टिकी हैं। खासकर मुंबई में आगामी स्थानीय निकाय और बीएमसी की राजनीति के लिहाज से बीजेपी और शिंदे सेना के बीच जमीनी प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें महत्वपूर्ण होंगी।
हालांकि, यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि महायुति सरकार में दोनों दलों का गठबंधन बरकरार है। इसलिए सहकारी बैंक का चुनावी मुकाबला सीधे राज्य सरकार के गठबंधन टूटने का संकेत नहीं माना जा सकता। यह अधिक व्यापक रूप से स्थानीय संगठन, सहकारी संस्थाओं और राजनीतिक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा का हिस्सा हो सकता है।
बैंक का आर्थिक आधार कितना बड़ा है?
मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक की आधिकारिक वित्तीय जानकारी बताती है कि पिछले वर्षों में बैंक का आकार लगातार बढ़ा है। 2024-25 में बैंक की कार्यशील पूंजी ₹10,282.07 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि 2023-24 में यह ₹9,551 करोड़ थी। इसी अवधि में जमा ₹8,127.76 करोड़ से बढ़कर ₹8,738.08 करोड़ हुई और कर्ज एवं अग्रिम ₹5,614.74 करोड़ से बढ़कर ₹6,437.35 करोड़ हो गए।
इस आर्थिक पहुंच और बड़े सहकारी सदस्य आधार को देखते हुए बैंक के निदेशक मंडल पर नियंत्रण का राजनीतिक महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
अभी क्या साफ है और क्या नहीं?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि मुंबई बैंक का चुनाव बीजेपी और शिंदे सेना के बीच संभावित शक्ति परीक्षण बन सकता है। लेकिन शिंदे सेना के आधिकारिक पैनल, उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति की अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ही मुकाबले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
इसलिए इसे अभी महायुति के भीतर किसी औपचारिक टकराव के बजाय सहकारिता क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
