आगरा के अछनेरा में करीब 1.60 करोड़ रुपये की लागत से बना वृहद गो संरक्षण केंद्र निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक गोवंश के लिए शुरू नहीं हो सका है। कचौरा मार्ग पर बने इस केंद्र की क्षमता 400 गोवंशों की है, लेकिन परिसर में गंदा पानी भरा रहने के कारण यहां करीब दो-दो फीट ऊंची घास उग आई है। स्थानीय स्तर पर केंद्र के संचालन में हो रही देरी और निर्माण की उपयोगिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थिति यह है कि निर्माण पूरा होने के करीब दो साल बाद भी केंद्र का दरवाजा नहीं खुला है और अब तक यहां एक भी गोवंश को संरक्षित नहीं किया गया। दूसरी ओर, क्षेत्र में छुट्टा गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं और किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
1.60 करोड़ की लागत से बना केंद्र, फिर भी नहीं शुरू हुआ संचालन
फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल ने 6 नवंबर 2023 को अछनेरा के कचौरा मार्ग पर वृहद गो संरक्षण केंद्र का शिलान्यास किया था। निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड (UPCLDF) को दी गई थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य 15 सितंबर 2024 को पूरा कर लिया गया। इसके बाद केंद्र को पशुपालन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद यहां अब तक गोवंश संरक्षण शुरू नहीं हो सका है।
प्रदेश में इस तरह के वृहद गो संरक्षण केंद्रों की निर्धारित क्षमता करीब 400 गोवंश की होती है और प्रति केंद्र निर्माण लागत लगभग ₹160.12 लाख रखी गई है।
नाले से नीची है परिसर की सतह, भरता है गंदा पानी
केंद्र के संचालन में सबसे बड़ी समस्या परिसर में जलभराव बताई जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके पांडेय के मुताबिक, केंद्र की सतह नाले से नीचे होने के कारण परिसर में नाले का पानी भर जाता है। इसी वजह से फिलहाल इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
पानी भरने के कारण परिसर में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। देखरेख के अभाव में भवन और परिसर की स्थिति भी खराब होने लगी है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निर्माण के दौरान जल निकासी और स्थल की ऊंचाई जैसी बुनियादी बातों का पर्याप्त ध्यान रखा गया था या नहीं। हालांकि, निर्माण में तकनीकी स्तर पर कोई खामी हुई है या नहीं, इसका निर्धारण जांच के बाद ही किया जा सकता है।
क्षेत्र में छुट्टा गोवंश, फिर भी खाली पड़ा केंद्र
अछनेरा क्षेत्र में बड़ी संख्या में छुट्टा गोवंश सड़कों और खेतों के आसपास घूम रहे हैं। ग्रामीणों और किसानों की ओर से इनके कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें अधिकारियों तक पहुंचती रही हैं।
ऐसे में 400 गोवंश की क्षमता वाला केंद्र तैयार होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं होना स्थानीय लोगों के लिए बड़ा सवाल बना हुआ है। किसान और स्थानीय प्रतिनिधि केंद्र को जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
निर्माण संस्था ने कहा- केंद्र पशुपालन विभाग को सौंप दिया
UPCLDF के अधिशासी अभियंता राजेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद केंद्र को पशुपालन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया था। उनके अनुसार, गोवंश के संरक्षण और केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग की है।
वहीं, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके पांडेय ने बताया कि केंद्र की क्षमता 400 गोवंश की है, लेकिन परिसर में नाले का पानी भरने के कारण फिलहाल इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में भी है।
किसान नेता ने जांच की मांग की
किसान-मजदूर नेता चौधरी दिलीप सिंह ने केंद्र को जल्द शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गोशाला शुरू होने से किसानों को छुट्टा गोवंश से फसलों को होने वाले नुकसान से राहत मिल सकती है।
उन्होंने गो संरक्षण केंद्र के निर्माण और इसके संचालन में हुई देरी की जांच कराने की भी मांग की है।
अब जल निकासी और संचालन पर फैसला अहम
यह मामला सिर्फ एक गोशाला के बंद पड़े रहने तक सीमित नहीं है। एक ओर सरकार वृहद गो संरक्षण केंद्रों के जरिए निराश्रित गोवंश के लिए क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है, वहीं अछनेरा में तैयार केंद्र जलभराव के कारण इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान कैसे करता है और केंद्र को कब तक गोवंश संरक्षण के लिए चालू किया जाता है। साथ ही, यदि निर्माण की डिजाइन या स्थल चयन में तकनीकी कमी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय करना जरूरी होगा।

