बाइक टैक्सी को लेकर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, निजी बाइक से सवारी बैठाने पर राज्यों से मंजूरी देने की अपील

indianloveindia
6 Min Read
बाइक टैक्सी को लेकर नितिन गडकरी का बड़ा बयान, निजी बाइक से सवारी बैठाने पर राज्यों से मंजूरी देने की अपील

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में बाइक टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा देने की वकालत की है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से निजी दोपहिया वाहनों को यात्रियों के परिवहन के लिए बाइक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की अपील की है। गडकरी के मुताबिक, इससे खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देशभर में सफेद नंबर प्लेट वाली निजी बाइक से कोई व्यक्ति तुरंत और बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के बाइक टैक्सी चला सकता है। केंद्र की मौजूदा व्यवस्था में राज्यों की भूमिका अहम है। जुलाई 2025 में जारी Motor Vehicle Aggregator Guidelines 2025 के तहत राज्य सरकारें गैर-परिवहन यानी निजी मोटरसाइकिलों को एग्रीगेटर के जरिए यात्रियों की साझा मोबिलिटी के लिए अनुमति दे सकती हैं।

सफेद नंबर प्लेट वाली बाइक पर क्या है नियम?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निजी बाइक को बाइक टैक्सी के तौर पर चलाने की अनुमति राज्य सरकार के फैसले और निर्धारित नियमों पर निर्भर करती है। केंद्र की 2025 की गाइडलाइन में राज्य सरकार को गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों को यात्रियों के सफर के लिए एग्रीगेटर के माध्यम से इस्तेमाल करने की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है।

गाइडलाइन के मुताबिक, राज्य सरकार इसके लिए अलग से ऑथराइजेशन फीस और अन्य शर्तें निर्धारित कर सकती है। यानी केवल बाइक पर सफेद नंबर प्लेट लगी होने से वह अपने आप व्यावसायिक यात्री सेवा के लिए अधिकृत नहीं हो जाती।

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में राज्यसभा में यह भी स्पष्ट किया था कि ‘बाइक टैक्सी’ शब्द मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 में अलग से परिभाषित नहीं है। ऐसे में राज्यों को 2025 की एग्रीगेटर गाइडलाइन के तहत अपनी व्यवस्था तय करने की भूमिका मिली हुई है।

गडकरी बोले- राज्यों को देनी चाहिए अनुमति

2 सितंबर 2026 को ‘सुरक्षा’ पायलट कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान गडकरी ने कहा कि केंद्र ने निजी दोपहिया वाहनों के जरिए यात्रियों को ले जाने की व्यवस्था का रास्ता खोला है, लेकिन कुछ राज्य अभी इसे अनुमति नहीं दे रहे हैं। उन्होंने राज्यों से इस दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।

गडकरी ने कहा कि परिवहन राज्य का विषय है और बाइक टैक्सी को लेकर अंतिम व्यवस्था राज्यों को करनी होगी। उनका मानना है कि इससे उन क्षेत्रों में भी लोगों को कमाई का साधन मिल सकता है, जहां रोजगार के विकल्प सीमित हैं।

8 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने का दावा

गडकरी ने बाइक टैक्सी सेवाओं के विस्तार से करीब 8 करोड़ लोगों के लिए रोजगार या आजीविका के अवसर पैदा होने की संभावना जताई है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में निजी दोपहिया वाहनों को आजीविका के साधन के रूप में इस्तेमाल करने पर उन्होंने जोर दिया। यह संख्या मंत्री द्वारा बताई गई संभावित रोजगार क्षमता है, न कि मौजूदा बाइक टैक्सी क्षेत्र में रोजगार पाने वाले लोगों का आधिकारिक आंकड़ा।

बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए नियम भी जरूरी

2025 की केंद्रीय गाइडलाइन में एग्रीगेटर के माध्यम से गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों को यात्रियों के लिए इस्तेमाल करने का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकारें अपनी शर्तें लागू कर सकती हैं। एग्रीगेटर के लिए वाहन और ड्राइवर से जुड़े सुरक्षा तथा अनुपालन संबंधी प्रावधान भी रखे गए हैं। गाइडलाइन में यात्रियों के लिए न्यूनतम बीमा, ड्राइवर की जांच और प्रशिक्षण तथा वाहन से जुड़े दस्तावेजों जैसी शर्तें शामिल हैं।

इसलिए बाइक टैक्सी शुरू करने की स्थिति राज्य-दर-राज्य अलग हो सकती है। किसी राज्य में अनुमति मिलने के बाद वहां लागू परमिट, ऑथराइजेशन, बीमा, एग्रीगेटर और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

ट्रैफिक नियम तोड़ने पर नेगेटिव पॉइंट सिस्टम

गडकरी ने इसी कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा को लेकर भी प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बार-बार यातायात नियम तोड़ने वाले चालकों के लिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लाने की तैयारी है।

प्रस्तावित व्यवस्था में हर उल्लंघन पर नकारात्मक अंक दिए जा सकते हैं। एक निर्धारित सीमा तक अंक जमा होने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जाने का प्रावधान हो सकता है। गडकरी ने इसे बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों पर लगाम लगाने की दिशा में कदम बताया।

‘सुरक्षा’ कार्यक्रम में 10 हजार लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

गडकरी ने ‘सुरक्षा’ नाम से एक पायलट कार्यक्रम भी शुरू किया। इसका उद्देश्य ड्राइवरों, निर्माण श्रमिकों और हाईवे तथा माइनिंग परियोजनाओं से जुड़े जोखिम वाले कर्मचारियों को मुफ्त मेडिकल जांच और काउंसलिंग उपलब्ध कराना है।

पायलट चरण में महाराष्ट्र के नागपुर-कामठी NH-44 सेक्शन और चंद्रपुर के माइनिंग क्षेत्र को शामिल किया गया है। करीब 150 किलोमीटर के क्षेत्र में शुरू किए जा रहे इस चरण में 10,000 लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। गडकरी ने ड्राइवरों की स्वास्थ्य जांच, विशेषकर आंखों की जांच, को सड़क सुरक्षा से सीधे जोड़ते हुए इस पर ध्यान देने की जरूरत बताई।

निष्कर्ष: केंद्र की नीति ने निजी दोपहिया वाहनों को एग्रीगेटर के जरिए बाइक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता जरूर खोला है, लेकिन सफेद नंबर प्लेट वाली हर निजी बाइक को पूरे देश में स्वतः बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति नहीं मिली है। संबंधित राज्य सरकार को अपनी व्यवस्था के तहत इसकी अनुमति और शर्तें तय करनी होंगी।

Share This Article