Pahalgam News: जिस बैसारन घाटी में हुआ था आतंकी हमला, अब वहां पहुंचेगी सड़क; ₹6.09 करोड़ से बदलेगी तस्वीर

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पहलगाम की जिस बैसारन घाटी में आतंकी हमला हुआ, वहां पहुंचने के लिए बन रही सड़क

पहलगाम: कश्मीर की खूबसूरत बैसारन घाटी एक बार फिर चर्चा में है। पहलगाम से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित इस मशहूर पर्यटन स्थल तक अब मोटर योग्य सड़क बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। खास बात यह है कि यही वह इलाका है जहां 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी। अब नई सड़क को पर्यटन सुविधा के साथ-साथ आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की पहुंच आसान बनाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैसारन को अक्सर उसकी हरी-भरी पहाड़ियों और खुले घास के मैदानों के कारण ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है। फिलहाल यहां पहुंचने के लिए पर्यटकों को काफी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है या टट्टू की सवारी करनी होती है।

6.09 करोड़ रुपये से बनेगी सड़क

सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड के मुताबिक सर्किट रोड से बैसारन घाटी तक सड़क विकसित करने और पेवमेंट का काम प्रस्तावित है। इसकी अनुमानित लागत 6,08,93,000 रुपये यानी करीब 6.09 करोड़ रुपये है। परियोजना के लिए जम्मू-कश्मीर के लोक निर्माण विभाग (PWD), पहलगाम की ओर से टेंडर जारी किया गया है। काम पूरा करने की अवधि 730 दिन यानी करीब दो साल रखी गई है।

नई सड़क बनने के बाद पहलगाम के मुख्य मार्ग से बैसारन तक वाहनों की पहुंच संभव हो सकेगी। इससे उन पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें फिलहाल पैदल या टट्टू के जरिए घाटी तक पहुंचना पड़ता है।

अभी पैदल या टट्टू से पहुंचते हैं पर्यटक

बैसारन घाटी पहलगाम के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल है। लेकिन यहां पहुंचना आसान नहीं है। सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों को पहाड़ी रास्ते से पैदल जाना पड़ता है या टट्टू किराए पर लेना पड़ता है।

नई सड़क बनने के बाद यह स्थिति बदल सकती है। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से बैसारन में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। हालांकि, टट्टू संचालकों के बीच यह चिंता भी है कि सड़क बनने के बाद पर्यटक घुड़सवारी की जगह वाहनों को प्राथमिकता दे सकते हैं।

सड़क बनने के बाद भी जारी रहेगी टट्टू सेवा

पहलगाम के विधायक अल्ताफ अहमद वानी (अल्ताफ कालू) ने कहा है कि सड़क बनने के बावजूद पैदल रास्ता बंद नहीं किया जाएगा और टट्टू संचालक भी अपनी सेवाएं जारी रख सकेंगे। यानी पर्यटकों के पास अपनी पसंद के मुताबिक सड़क मार्ग या पारंपरिक टट्टू सेवा चुनने का विकल्प रहेगा।

इस परियोजना को बैसारन को पहलगाम के दूसरे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

2025 के आतंकी हमले के बाद सुरक्षा पर भी जोर

बैसारन घाटी का नाम अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि 22 अप्रैल 2025 के आतंकी हमले के कारण भी याद किया जाता है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

सड़क निर्माण को लेकर सुरक्षा का पहलू भी महत्वपूर्ण है। घटना के बाद यह बात सामने आई थी कि दुर्गम इलाके के कारण सुरक्षा बलों और राहत टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किल हुई थी। अब सड़क बनने से आपात स्थिति में सुरक्षा बलों और राहत एजेंसियों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हो सकती है।

विधायक ने इस घटना को राष्ट्रीय त्रासदी बताते हुए कहा कि अगर उस समय घटनास्थल तक सड़क होती तो शायद हालात अलग हो सकते थे।

सर्दियों में भी पहुंच आसान होने की उम्मीद

नई सड़क का एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि बैसारन तक पहुंच सिर्फ गर्मियों के पर्यटन सीजन तक सीमित न रहे। बेहतर सड़क संपर्क से सर्दियों में भी पर्यटकों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

परियोजना पूरी होने के बाद बैसारन में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए परिवहन, टैक्सी और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

हालांकि, सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण और स्थानीय पर्यटन व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। बैसारन की प्राकृतिक खूबसूरती ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है, इसलिए विकास के साथ इसके पर्यावरणीय स्वरूप को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी होगा।

फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड में सर्किट रोड से बैसारन घाटी तक सड़क परियोजना की लागत करीब 6.09 करोड़ रुपये और निर्माण अवधि 730 दिन दर्ज है।

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