आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में दहेज उत्पीड़न और मारपीट के एक मामले में अदालत ने पति और सास-ससुर को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। आरोप था कि शादी के बाद विवाहिता को अतिरिक्त दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, उसके सांवले रंग को लेकर ताने मारे गए और उस पर मायके से पैसे लाने का दबाव बनाया गया। मामले की सुनवाई के बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता ने पति, सास और ससुर को दोषी मानते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।
अदालत ने तीनों को धारा 498ए के तहत दो वर्ष के साधारण कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी है। वहीं मारपीट और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में भी उन्हें दंडित किया गया है। मामले में ननद को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर बरी कर दिया गया।
2019 में हुई थी शादी, दोनों करते थे नौकरी
मामला कमला नगर थाना क्षेत्र का है। राधा विहार एक्सटेंशन निवासी बैंक से सेवानिवृत्त रविकांत चतुर्वेदी ने अपनी बेटी तन्वी चतुर्वेदी की शादी 26 फरवरी 2019 को मूल रूप से बाह क्षेत्र के होलीपुरा निवासी रोहित चतुर्वेदी से की थी।
शादी के समय रोहित का परिवार कोलकाता में रह रहा था। रोहित सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि तन्वी भी नौकरी करती थीं।
शिकायत के मुताबिक शादी के बाद तन्वी पर कथित तौर पर अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव बनाया जाने लगा।
पांच लाख के बाद 10 लाख रुपये मांगने का आरोप
विवाहिता के पिता के मुताबिक ससुराल पक्ष की ओर से पांच लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी। इसके साथ ही बंगलूरू स्थित फ्लैट को तन्वी के नाम कराने का दबाव भी बनाया गया।
आरोप है कि पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद बेटी से 10 लाख रुपये की मांग की जाने लगी। इतना ही नहीं, उसके सांवले रंग को लेकर भी कथित तौर पर ताने दिए जाते थे।
पिता ने आरोप लगाया कि सास-ससुर का व्यवहार भी बेटी के प्रति ठीक नहीं था और उसके साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया जाता था। लगातार प्रताड़ना के कारण तन्वी कथित तौर पर अवसाद में रहने लगी।
2021 में मायके लेकर आए पिता
मामला उस समय गंभीर हो गया जब तन्वी के पिता उसे 16 जुलाई 2021 को आगरा लेकर आए। शिकायत के अनुसार उस समय उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी।
इसके बाद कमला नगर थाने में पति रोहित चतुर्वेदी, ससुर मधुर चतुर्वेदी, सास निशा चतुर्वेदी और ननद सौम्या के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
मामले की सुनवाई विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानंद गुप्ता की अदालत में हुई।
कोर्ट में नहीं पहुंचे तो जारी हुआ गैर जमानती वारंट
अदालत ने 4 अगस्त को मामले में आदेश सुनाया, लेकिन दोषी ठहराए गए तीनों आरोपी उस समय कोर्ट में मौजूद नहीं थे। उनकी ओर से हाजिरी माफी का प्रार्थनापत्र दिया गया, जिसे अदालत ने निरस्त कर दिया।
इसके बाद कोर्ट ने तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। 10 अगस्त को तीनों अदालत में पेश हुए, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई।
अदालत ने दोषियों को अपील के लिए एक महीने का समय भी दिया है।
किस धारा में कितनी सजा?
अदालत के आदेश के मुताबिक—
- धारा 498ए (दहेज उत्पीड़न): पति रोहित, ससुर मधुर और सास निशा को 2 वर्ष का साधारण कारावास और प्रत्येक को 1,000 रुपये अर्थदंड।
- धारा 323 (मारपीट): तीनों को 6 महीने का साधारण कारावास और प्रत्येक को 500 रुपये अर्थदंड।
- धारा 4, दहेज प्रतिषेध अधिनियम: तीनों को 1 वर्ष का साधारण कारावास और प्रत्येक को 2,000 रुपये अर्थदंड।
अर्थदंड नहीं देने पर दोषियों को एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने सभी सजाओं को साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। साथ ही, आरोपियों द्वारा अब तक जेल में बिताई गई अवधि को सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
ननद को साक्ष्य के अभाव में मिली राहत
मामले में शामिल ननद सौम्या चतुर्वेदी को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। यानी अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पति, सास और ससुर को दोषी माना, जबकि ननद के खिलाफ आरोप साबित नहीं हो सके।

