कॉन्ट्रैक्ट कवच: ताजनगरी के क्रिकेटरों को बड़ी उम्मीद, यूपीसीए की एजीएम में पेंशन पर भी चर्चा संभव

indianloveindia
6 Min Read
कॉन्ट्रैक्ट कवच: ताजनगरी के क्रिकेटरों को बड़ी उम्मीद, यूपीसीए की एजीएम में पेंशन पर भी चर्चा संभव

आगरा: उत्तर प्रदेश के घरेलू क्रिकेटरों के लिए आर्थिक सुरक्षा की दिशा में एक नई उम्मीद जगी है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) भी घरेलू खिलाड़ियों के लिए सालाना प्लेयर कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर विचार कर सकता है। अगले महीने कानपुर में प्रस्तावित यूपीसीए की वार्षिक आमसभा (AGM) में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अभी इसे यूपीसीए का तय फैसला नहीं माना जा सकता।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने 2026-27 सत्र से घरेलू खिलाड़ियों के लिए अनुबंध व्यवस्था शुरू कर देश में इस तरह की पहल करने वाला पहला राज्य क्रिकेट संघ बनने की घोषणा की थी। शुरुआती मॉडल में खिलाड़ियों को प्रदर्शन, अनुभव, फिटनेस और चयन समिति की सिफारिश के आधार पर तीन ग्रेड में रखने का प्रस्ताव था। अप्रैल में घोषित ढांचे में ग्रेड ए के लिए 12 से 20 लाख, ग्रेड बी के लिए 8 से 12 लाख और ग्रेड सी के लिए 8 लाख रुपये तक सालाना रिटेनर की बात कही गई थी।

बाद में अगस्त 2026 में MCA ने 2026-27 के लिए अपने अनुबंधित खिलाड़ियों की अंतिम सूची जारी की। इसमें ग्रेड ए के खिलाड़ियों के लिए 12 लाख, ग्रेड बी के लिए 8 लाख और ग्रेड सी के लिए 6 लाख रुपये सालाना रिटेनर तय किए गए। इसलिए यूपीसीए के संभावित मॉडल में मुंबई की मौजूदा अंतिम व्यवस्था को संदर्भ के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन यूपी में राशि और पात्रता के नियम अलग हो सकते हैं।

आगरा के खिलाड़ियों को भी मिल सकता है फायदा

अगर यूपीसीए घरेलू खिलाड़ियों के लिए अनुबंध व्यवस्था लागू करता है तो लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। अभी घरेलू क्रिकेट में कई खिलाड़ी लंबे समय तक अभ्यास, फिटनेस और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बावजूद आर्थिक अनिश्चितता का सामना करते हैं।

पूर्व इंडिया-ए क्रिकेटर केके शर्मा का कहना है कि घरेलू क्रिकेटरों को आर्थिक सुरक्षा मिलना अच्छी पहल होगी। उनके मुताबिक, नियमित अनुबंध मिलने से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक दबाव कम करने और अपने खेल व फिटनेस पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

आगरा में भी ऐसे खिलाड़ियों की कमी नहीं है, जो लगातार घरेलू स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में यदि यूपीसीए प्रदर्शन आधारित कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू करता है तो ताजनगरी के खिलाड़ियों के लिए भी आर्थिक स्थिरता का रास्ता खुल सकता है।

प्रदर्शन और फिटनेस बन सकते हैं आधार

मुंबई मॉडल में अनुबंध के लिए खिलाड़ी का पंजीकरण, फिटनेस मानक, प्रदर्शन और चयन समिति की सिफारिश जैसे मानदंड रखे गए हैं। साथ ही यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन घरेलू खिलाड़ियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो भारतीय टीम या आईपीएल के जरिए मिलने वाली बड़ी आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा नहीं हैं।

यूपीसीए अगर इस दिशा में आगे बढ़ता है तो वह अपने खिलाड़ियों के लिए अलग श्रेणियां, पात्रता और भुगतान तय कर सकता है। ऐसे में सिर्फ नाम या वरिष्ठता के बजाय प्रदर्शन और फिटनेस को महत्व दिए जाने की उम्मीद है।

पूर्व क्रिकेटरों की पेंशन का मुद्दा भी अहम

एजीएम में सिर्फ मौजूदा खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि पूर्व क्रिकेटरों के लिए नियमित पेंशन का मुद्दा भी चर्चा में आने की उम्मीद है।

यूपी के पूर्व क्रिकेटरों के लिए आर्थिक सहायता का मुद्दा नया नहीं है। पुराने वर्षों में यूपीसीए की ओर से पूर्व खिलाड़ियों को एकमुश्त आर्थिक सहायता दिए जाने की व्यवस्था रही है। वर्ष 2014 में भी यूपीसीए की ओर से पूर्व रणजी खिलाड़ियों के लिए एकमुश्त सहायता योजना की खबर सामने आई थी।

पूर्व खिलाड़ियों के लिए नियमित पेंशन की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। 2020 में यूपीसीए स्तर पर पेंशन योजना पर सहमति बनने और पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने की रिपोर्ट सामने आई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में योजना के पूरी तरह लागू नहीं होने की बात कही गई थी।

अब पूर्व खिलाड़ियों के बीच उम्मीद है कि इस मुद्दे को फिर गंभीरता से लिया जाएगा।

आगरा जिला वेटरन क्रिकेट संघ के कोषाध्यक्ष गिरजेश तिवारी का कहना है कि पूर्व क्रिकेटरों ने वर्षों तक प्रदेश के क्रिकेट को अपना योगदान दिया है। उनके अनुसार, यदि नियमित पेंशन की व्यवस्था होती है तो यह केवल आर्थिक मदद नहीं होगी, बल्कि पूर्व खिलाड़ियों के योगदान का सम्मान भी होगा।

युवा खिलाड़ियों को भविष्य की चिंता कम होने की उम्मीद

आगरा के युवा तेज गेंदबाज दीपक नरवार का मानना है कि मुंबई जैसे मॉडल से अगर यूपी के घरेलू खिलाड़ियों को नियमित आर्थिक सुरक्षा मिलती है तो इसका असर उनके प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। खिलाड़ियों को भविष्य की वित्तीय चिंता कम होगी और वे प्रशिक्षण, फिटनेस और खेल पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।

अब नजर यूपीसीए की आगामी एजीएम पर है। यदि प्लेयर कॉन्ट्रैक्ट और पूर्व क्रिकेटरों की पेंशन जैसे मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा होती है, तो इसका असर उत्तर प्रदेश के घरेलू क्रिकेट ढांचे और खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा पर लंबे समय तक पड़ सकता है। फिलहाल दोनों मुद्दे चर्चा और उम्मीद के स्तर पर हैं; यूपीसीए की ओर से अंतिम निर्णय की पुष्टि का इंतजार है।

Share This Article