तरुण तेजपाल को बड़ा झटका! ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, हाईकोर्ट ने ठहराया दोषी; अब सजा की बारी

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तरुण तेजपाल को बड़ा झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

पणजी। तहलका मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 2021 में सुनाए गए बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का आदेश दिया जाएगा।

न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने यह फैसला गोवा सरकार की उस अपील पर सुनाया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। सरकार का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा, “ट्रायल कोर्ट का फैसला और आदेश रद्द किया जाता है। तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया जाता है। यदि दोनों पक्ष आज ही सजा के मुद्दे पर अपनी दलीलें रखें तो अदालत उसे प्राथमिकता से सुनेगी।”

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया। साथ ही कहा कि सजा पर सुनवाई पूरी होने तक उन्हें तत्काल आत्मसमर्पण करने की आवश्यकता नहीं होगी।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि सजा पर बहस दोपहर 2:30 बजे से शुरू की जाए, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

तरुण तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने सजा में नरमी की अपील करते हुए कहा कि यह उनके मुवक्किल का पहला अपराध है। वह 62 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक हैं और पहले लगभग छह महीने न्यायिक हिरासत में रह चुके हैं। उन्होंने अदालत से न्यूनतम सजा देने का अनुरोध किया और कहा कि हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का कानूनी अधिकार उनके मुवक्किल के पास सुरक्षित है।

अदालत में क्या बोले तरुण तेजपाल?

अदालत ने तरुण तेजपाल को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा,

“पिछले 30 वर्षों से हमने तथ्य और सच सामने लाने का काम किया है। आज शायद उसका कोई महत्व नहीं रह गया है। मैं दो बेटियों का पिता हूं और मेरा परिवार है। अब हमारे पास उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प है। मेरे वकील ने मुझसे अदालत से सजा में नरमी की अपील करने को कहा है।”

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि आरोपी ने अपने कृत्य पर किसी प्रकार का पछतावा नहीं जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के अगले दिन भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला और उसका रवैया बेहद निर्भीक था। इसलिए सजा तय करते समय इन पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2013 का है। आरोप है कि गोवा के एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तहलका मैगजीन में कार्यरत एक महिला सहकर्मी के साथ तरुण तेजपाल ने यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया था।

घटना के बाद 30 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में लंबी सुनवाई के बाद गोवा की ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2021 में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। अब बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। फिलहाल सभी की नजरें अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर टिकी हैं।

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