Moradabad: तेंदुए ने घोड़े का किया शिकार, खेत में घसीटकर नोचा; इलाके में दहशत, पकड़ने को बढ़ाया अभियान

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Moradabad: तेंदुए ने किया घोड़े का शिकार, खेत में ले जाकर गर्दन और पेट नोच खाया, मंडल भर में लगाए 90 पिंजरे

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार सुबह गांव चंदपुर गुलरिया मुस्तापुर में एक तेंदुए ने खेत के पास घास चर रहे घोड़े का शिकार कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुआ घोड़े को घसीटकर गन्ने के खेत में ले गया, जहां उसने उसके शरीर को बुरी तरह नोच डाला।

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक तेंदुआ गन्ने के खेत में गायब हो चुका था। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण खेतों में जाने से बच रहे हैं और बच्चों को भी घरों से बाहर भेजने में डर रहे हैं।

पहले महिला की मौत से दहशत में ग्रामीण

ठाकुरद्वारा क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियां पहले भी चिंता का कारण बन चुकी हैं। तीन अगस्त को लालापुर पीपलसाना गांव में खेत में काम कर रही एक महिला पर तेंदुए ने हमला कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद वन विभाग ने तेंदुओं को पकड़ने के लिए अभियान और तेज कर दिया है।

चार जिलों की टीमें अभियान में जुटीं

तेंदुओं की तलाश और उन्हें पकड़ने के लिए मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर और अमरोहा वन प्रभागों की टीमें इलाके में तैनात हैं। इनके अलावा पीलीभीत टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ, थर्मल ड्रोन ऑपरेटर और आगरा की रेस्क्यू टीम भी अभियान में सहयोग कर रही है।

संवेदनशील गांवों में करीब 10 पिंजरे पहले ही लगाए जा चुके हैं। शुक्रवार को बिजनौर से दो और पिंजरे मंगाकर चंदपुर गुलरिया मुस्तापुर में लगाए गए। जिस जगह तेंदुए ने घोड़े का शिकार किया और उसे घसीटकर खेत में ले गया, वहां वन विभाग की टीम ने कई घंटे तक कांबिंग की। आसपास के खेतों में ड्रोन से भी निगरानी की गई, लेकिन तेंदुए का पता नहीं चल सका।

मंडल में लगाए जा रहे पिंजरे

वन विभाग ने तेंदुओं की गतिविधियों वाले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक, मुरादाबाद मंडल के संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पिंजरे लगाए जा रहे हैं, ताकि तेंदुओं को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।

गन्ने के खेतों को सुरक्षित ठिकाना मान रहे तेंदुए

मंडलीय वन संरक्षक आदर्श कुमार के अनुसार, कोविड काल के दौरान खेतों में मानवीय गतिविधियां कम होने से गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित ठिकाने बन गए थे। इस दौरान तेंदुओं के प्रजनन में भी बढ़ोतरी हुई।

वन विभाग का अनुमान है कि केवल ठाकुरद्वारा क्षेत्र में इस साल करीब 30 तेंदुए के शावकों का जन्म हुआ है। अधिकारियों का यह भी मानना है कि जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ तेंदुए अपने लिए नए क्षेत्र तलाशते हुए गन्ने के खेतों और आबादी वाले इलाकों की ओर आ रहे हैं।

वन विभाग की टीमें लगातार गश्त और निगरानी कर रही हैं। ग्रामीणों से भी खेतों में अकेले न जाने और तेंदुए की गतिविधि दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।

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