लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति अपने नाम कराने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तराधिकारी या वसीयत के आधार पर मकान का नामांतरण (दाखिल-खारिज) कराने पर अब एक समान 5,000 रुपये शुल्क नहीं देना होगा। शासन ने संपत्ति के क्षेत्रफल के हिसाब से नया शुल्क तय कर दिया है। इससे खासतौर पर छोटे मकान और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के भवन मालिकों को सीधा फायदा मिलेगा।
नई व्यवस्था के तहत 1,000 वर्गफीट तक के मकान के नामांतरण के लिए सिर्फ 1,000 रुपये देने होंगे। यानी पहले के 5,000 रुपये के मुकाबले छोटे मकान मालिकों को 4,000 रुपये की बचत होगी।
अब मकान के आकार के हिसाब से लगेगा शुल्क
शासन के नए प्रावधान के अनुसार उत्तराधिकार या पंजीकृत वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए शुल्क इस तरह निर्धारित किया गया है:
| संपत्ति का क्षेत्रफल | नया नामांतरण शुल्क |
|---|---|
| 1,000 वर्गफीट तक | ₹1,000 |
| 1,001 से 2,000 वर्गफीट तक | ₹2,000 |
| 2,001 से 3,000 वर्गफीट तक | ₹3,000 |
| 3,000 वर्गफीट से अधिक | ₹5,000 |
यानी 1,000 वर्गफीट तक के मकान पर शुल्क में पांच गुना तक की कमी होगी। नए नियमों का लाभ भवन स्वामियों को शासनादेश के प्रभावी होने के बाद मिलने लगेगा। समान शुल्क व्यवस्था को लेकर नगर निकायों में पहले से प्रक्रिया और शुल्क में अंतर था, जिसे कम करने की दिशा में सरकार ने कदम उठाया है।
पहले सभी के लिए था 5,000 रुपये शुल्क
अब तक पारिवारिक संपत्ति के उत्तराधिकारी के नाम नामांतरण पर नगर निगम में 5,000 रुपये का शुल्क लिया जा रहा था। खास बात यह थी कि यह शुल्क छोटे ईडब्ल्यूएस मकान से लेकर बड़े, हजारों वर्गफीट के मकान तक के लिए समान था।
इस व्यवस्था में छोटे मकान मालिकों को अपेक्षाकृत ज्यादा आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। अब क्षेत्रफल के आधार पर शुल्क तय होने से छोटे मकानों पर यह बोझ काफी कम हो जाएगा।
नगर निगम लखनऊ की मौजूदा नामांतरण व्यवस्था में भी दर्ज स्वामी की मृत्यु के आधार पर उत्तराधिकारी के नाम नामांतरण के लिए 5,000 रुपये शुल्क प्रदर्शित किया गया है।
करीब दो साल पहले बदली थी नामांतरण व्यवस्था
करीब दो साल पहले तक संपत्ति के दाखिल-खारिज के लिए संपत्ति की कीमत के आधार पर एक प्रतिशत तक शुल्क लिया जाता था। बाद में शासन के निर्देश पर नामांतरण शुल्क की व्यवस्था में बदलाव किया गया।
इसके बाद एलडीए और आवास विकास की तर्ज पर बैनामे के आधार पर होने वाले नामांतरण के शुल्क को कम किया गया, जिससे संपत्ति खरीदकर अपने नाम कराने वालों को राहत मिली। लेकिन पैतृक संपत्ति, उत्तराधिकार और वसीयत के मामलों में 5,000 रुपये का शुल्क बना रहा।
यूपी की 2022 की नामांतरण नियमावली में भी कानूनी वारिस या पंजीकृत वसीयत के मामले में 5,000 रुपये नामांतरण प्रभार का प्रावधान दर्ज है। वहीं अन्य संपत्तियों के नामांतरण के लिए संपत्ति मूल्य के आधार पर 1,000 से 10,000 रुपये तक की अलग स्लैब व्यवस्था है।
सवाल उठा तो शासन ने बदला नियम
उत्तराधिकार के मामलों में छोटे-बड़े सभी मकानों पर समान 5,000 रुपये शुल्क लिए जाने को लेकर सवाल उठते रहे थे। खासतौर पर छोटे मकान और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह शुल्क अनुपातहीन माना जा रहा था।
इसके बाद शासन स्तर पर वसीयत और उत्तराधिकार के आधार पर होने वाले नामांतरण शुल्क को भी क्षेत्रफल के आधार पर निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया। अब कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई दरों को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।
इससे प्रदेश में नामांतरण शुल्क को अधिक एकरूप और तर्कसंगत बनाने की कोशिश की गई है। पहले अलग-अलग नगर निकायों में शुल्क को लेकर काफी अंतर था।
किसे सबसे ज्यादा फायदा?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा छोटे मकान मालिकों और सामान्य परिवारों को मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति को 800 वर्गफीट का पैतृक मकान विरासत में मिला है, तो नामांतरण के लिए पहले जहां 5,000 रुपये देने पड़ते थे, वहीं नई व्यवस्था में शुल्क 1,000 रुपये होगा।
इसी तरह 1,500 वर्गफीट के मकान पर 2,000 रुपये और 2,500 वर्गफीट के मकान पर 3,000 रुपये शुल्क देना होगा।
एक नजर में समझें
800 वर्गफीट मकान: ₹5,000 से घटकर ₹1,000
1,500 वर्गफीट मकान: ₹5,000 से घटकर ₹2,000
2,500 वर्गफीट मकान: ₹5,000 से घटकर ₹3,000
3,000 वर्गफीट से अधिक: ₹5,000
इस तरह सरकार की नई व्यवस्था का सीधा संदेश है—मकान जितना छोटा, नामांतरण शुल्क में उतनी बड़ी राहत।

