आगरा में मंडी विवाद ने पकड़ा तूल! व्यापारियों ने खून से लिखी राज्यपाल को चिट्ठी, 11वें दिन भी धरना जारी

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कलुआराम मंडी विवाद: व्यापारियों ने खून से लिखी चिट्ठी, राज्यपाल से लगाई ये गुहार; 11वें दिन भी धरना रहा जारी

आगरा। बरौली अहीर की नवीन फल एवं सब्जी मंडी में व्यापारियों का आंदोलन अब और तीखा होता जा रहा है। कलुआराम मंडी उपस्थल की अधिसूचना रद्द कराने की मांग को लेकर व्यापारी 11वें दिन भी धरने पर डटे रहे। मंगलवार को आंदोलनरत व्यापारियों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए खून से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के नाम पत्र लिखा और कलुआराम मंडी को बंद कराने की गुहार लगाई।

व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए कलुआराम मंडी उपस्थल की अधिसूचना जारी की, जिसका सीधा असर बरौली अहीर में बनी सरकारी मंडी के कारोबार पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब तक बसई क्षेत्र में चल रही वैकल्पिक मंडियों और फुटकर बाजार पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बरौली अहीर मंडी को अपेक्षित कारोबार नहीं मिल पाएगा।

खून से लिखी चिट्ठी में क्या कहा?

बरौली अहीर मंडी एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रवेंद्र कुमार के मुताबिक, धरना स्थल से राज्यपाल को भेजे गए पत्र में कलुआराम मंडी उपस्थल की अधिसूचना तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

व्यापारियों का आरोप है कि शिकायतें किए जाने के बावजूद कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग की ओर से मामले में प्रभावी जांच और कार्रवाई नहीं की गई। उनका दावा है कि नियमों के विपरीत जारी अधिसूचना के कारण फुटकर व्यापार की दुकानें मंडी के रूप में संचालित होने लगीं और इसका नुकसान बरौली अहीर की सरकारी मंडी को उठाना पड़ रहा है।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि अब तक कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी समस्याएं सुनने धरना स्थल पर नहीं पहुंचा है।

2017-18 में बनी सरकारी मंडी, फिर भी कारोबार पर संकट

मामले में उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, आगरा में अतिरिक्त फल-सब्जी मंडी स्थल, बरौली अहीर वर्ष 2017-18 में स्थापित की गई थी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में दिए गए सरकारी जवाब के अनुसार, भूमि खरीद पर करीब ₹3.46 करोड़ और मंडी निर्माण पर करीब ₹8.69 करोड़ खर्च हुए थे। मंडी के लिए 2.342 एकड़ भूमि आवंटित है।

सरकारी रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि बरौली अहीर मंडी में 43 दुकानें और 30 सुपर मार्केट दुकानें निर्मित हैं। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि आसपास संचालित अन्य मंडियों के कारण यहां अपेक्षित व्यापार नहीं आ पा रहा है।

कलुआराम मंडी को लेकर सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है?

इस विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि कलुआराम मंडी उपस्थल को लेकर सरकारी अधिसूचना वास्तव में मौजूद है।

उत्तर प्रदेश कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार निदेशालय के रिकॉर्ड के अनुसार, 15 मई 2020 को जारी अधिसूचना के तहत श्री कलुआराम पुत्र निनुआराम के स्वामित्व वाली बसई, ताजगंज स्थित भूमि को 20 वर्ष की अवधि के लिए मंडी उपस्थल घोषित किया गया था। रिकॉर्ड में कुल 5,240 वर्ग मीटर भूमि का उल्लेख है।

यही सरकारी प्रावधान अब बरौली अहीर के व्यापारियों और प्रशासन के बीच विवाद का मुख्य केंद्र बन गया है।

पहले भी खत्म हुआ था धरना, लेकिन फिर शुरू हुआ आंदोलन

यह पहली बार नहीं है जब व्यापारी इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरे हैं। इससे पहले भी बरौली अहीर मंडी परिसर में धरना दिया गया था। तब व्यापारियों को बसई की अवैध मंडियों को बंद कराने और कलुआराम मंडी को लेकर कार्रवाई का आश्वासन मिला था।

व्यापारियों का कहना है कि आश्वासन के बाद धरना समाप्त कर दिया गया, लेकिन बाद में बसई क्षेत्र में गतिविधियां दोबारा शुरू हो गईं और कलुआराम मंडी में भी फुटकर बाजार बंद नहीं कराया गया। इससे नाराज व्यापारियों ने 1 अगस्त से दोबारा धरना शुरू कर दिया।

इससे पहले जुलाई में भी व्यापारी कलुआराम मंडी को बंद कराने की मांग पर लंबे समय तक धरने पर बैठे थे और कार्रवाई नहीं होने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दे चुके थे।

सुल्लड़ मंडी पर कार्रवाई हुई, लेकिन व्यापारियों की मांग अधूरी

जुलाई में आंदोलन के दौरान मंडी समिति ने बसई की सुल्लड़ मंडी के संचालक को नोटिस जारी किया था और वहां नोटिस चस्पा किए गए थे। हालांकि, बरौली अहीर के व्यापारी इससे संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कलुआराम मंडी के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग जारी रखी।

व्यापारियों का तर्क है कि केवल एक मंडी पर कार्रवाई से बरौली अहीर मंडी का संचालन सुचारु नहीं होगा। उनका कहना है कि बसई क्षेत्र में चल रहे वैकल्पिक व्यापारिक ठिकानों को हटाकर फल-सब्जी कारोबार को बरौली अहीर की सरकारी मंडी में लाया जाना चाहिए।

असली टकराव सरकारी मंडी बनाम मंडी उपस्थल का

पूरे विवाद की जड़ यही है—बरौली अहीर में सरकारी मंडी स्थापित हो चुकी है, लेकिन बसई में कलुआराम मंडी उपस्थल भी सरकारी अधिसूचना के तहत मौजूद है।

सरकारी जवाब में साफ कहा गया है कि कलुआराम मंडी उपस्थल को 20 वर्ष के लिए घोषित किए जाने के कारण वहां का व्यापार बरौली अहीर फल-सब्जी मंडी स्थल में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।

दूसरी तरफ बरौली अहीर के व्यापारी इसी व्यवस्था को अपनी मंडी के कारोबार में सबसे बड़ी बाधा बता रहे हैं। यही वजह है कि अब मामला धरने से आगे बढ़कर राज्यपाल तक लिखे गए खून के पत्र तक पहुंच गया है।

11वें दिन भी नहीं टूटा व्यापारियों का हौसला

धरने में रामकुमार, रामवीर कुशवाह, रहीस खां, गजेंद्र कुशवाह, वीरी सिंह, भीम सिंह, होती लाल, लाल तोमर समेत कई व्यापारी मौजूद रहे।

व्यापारियों ने साफ संकेत दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। अब नजर इस बात पर है कि राज्यपाल को भेजे गए खून से लिखे पत्र के बाद प्रशासन और कृषि विपणन विभाग इस पुराने मंडी विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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