जेल में बंद प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मिला मोबाइल, मचा हड़कंप; लापरवाही पर जेल अधिकारी सस्पेंड

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दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद प्रज्वल रेवन्ना के पास मिला मोबाइल फोन, लापरवाही पर जेल अधिकारी सस्पेंड

बेंगलुरु: दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को लेकर बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल से बड़ा मामला सामने आया है। केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की अचानक हुई छापेमारी में रेवन्ना की बैरक से एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया गया है।

जेल प्रशासन के मुताबिक, 11 अगस्त को हाई-सिक्योरिटी जेल में करीब चार से पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान रेवन्ना की बैरक से फोन मिलने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में जेल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी गई है।

CCB ने जेल में अचानक मारा छापा

पुलिस महानिदेशक (जेल एवं सुधार सेवाएं) आलोक कुमार के मुताबिक, CCB की टीम ने मंगलवार दोपहर परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में तलाशी अभियान चलाया।

यह अभियान हाई-प्रोफाइल कैदियों समेत अन्य कैदियों के बैरकों की जांच के लिए चलाया गया था। कई घंटे चली तलाशी के दौरान प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एक एंड्रॉयड फोन बरामद हुआ।

आलोक कुमार ने बताया कि इस संबंध में CCB ने परप्पना अग्रहारा थाने में शिकायत दर्ज कराई है और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।

फोन किसका था? जांच में सामने आएगा सच

जेल अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में यह दावा सामने आया है कि बरामद फोन रेवन्ना का नहीं बल्कि किसी दूसरे कैदी का था।

हालांकि, जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-सिक्योरिटी जेल में मोबाइल फोन पहुंचा कैसे और वह रेवन्ना की बैरक तक कैसे पहुंचा?

जेल प्रशासन के अनुसार, रेवन्ना ने कथित तौर पर इस फोन का इस्तेमाल कुछ कॉल करने के लिए किया था। अब जांच एजेंसियां फोन की कॉल डिटेल, उसमें मौजूद डेटा और यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि इसका इस्तेमाल कब और किसके संपर्क में रहने के लिए किया गया।

6 अगस्त को भी हुई थी बैरक की तलाशी

इस मामले ने जेल प्रशासन की पिछली तलाशी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, 6 अगस्त को भी प्रज्वल रेवन्ना की बैरक की तलाशी ली गई थी, लेकिन उस समय कोई प्रतिबंधित सामान बरामद नहीं हुआ था।

इसके महज कुछ दिन बाद हुई CCB की तलाशी में मोबाइल फोन मिलने से जेल सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

लापरवाही पर सहायक अधीक्षक सस्पेंड

मोबाइल बरामद होने के बाद जेल प्रशासन ने भी कार्रवाई की है। पुलिस महानिदेशक (दक्षिण) की रिपोर्ट के आधार पर सहायक अधीक्षक इरन्ना रंगापुर को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

वहीं, बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

यानी अब सिर्फ मोबाइल फोन मिलने की जांच नहीं होगी, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि जेल में प्रतिबंधित वस्तु पहुंचने के लिए कौन जिम्मेदार था और सुरक्षा जांच में कहां चूक हुई।

तलाशी में और कोई प्रतिबंधित सामान नहीं मिला

अधिकारियों ने बताया कि 11 अगस्त को हुई व्यापक तलाशी के दौरान मोबाइल फोन के अलावा कोई अन्य प्रतिबंधित सामान बरामद नहीं हुआ।

फिलहाल इस घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में जेल कर्मचारियों, कैदियों और मोबाइल फोन के संभावित स्रोत से जुड़े पहलुओं को शामिल किया जा सकता है।

कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?

प्रज्वल रेवन्ना ने 2019 से 2024 तक लोकसभा में कर्नाटक की हासन सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 2024 में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के गंभीर आरोप सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।

उन्हें मई 2024 में गिरफ्तार किया गया था। बाद में बेंगलुरु की विशेष अदालत ने एक दुष्कर्म मामले में उन्हें दोषी ठहराया और अगस्त 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके बाद से वह परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में बंद हैं।

जेल में मोबाइल मिलने से कई सवाल

हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद एक हाई-प्रोफाइल कैदी की बैरक से मोबाइल फोन मिलना अपने आप में गंभीर सुरक्षा मामला है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि फोन जेल के भीतर कैसे पहुंचा, किस कैदी का था, रेवन्ना ने कितनी बार उसका इस्तेमाल किया और किन लोगों से संपर्क किया गया।

सबसे अहम सवाल यह भी है कि क्या फोन का इस्तेमाल सिर्फ सामान्य कॉल के लिए हुआ या इससे रेवन्ना के चल रहे मामलों से जुड़ी किसी गतिविधि को अंजाम दिया गया?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। लेकिन एक बात साफ है कि इस बरामदगी ने परप्पना अग्रहारा जेल की सुरक्षा व्यवस्था और हाई-प्रोफाइल कैदियों की निगरानी को लेकर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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